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जब धर्म और अधर्म के बीच युद्ध छिड़ता है, तब विजय केवल शस्त्रों से नहीं बल्कि बुद्धि, नीति और साहस से तय होती है।
त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह एक रोमांचक हिंदी ऐतिहासिक उपन्यास है जिसमें युद्ध, राजनीति और रणनीति का संगम देखने को मिलता है। महाराज नीलमणि और उनके साथियों को शत्रुओं के साथ-साथ विश्वासघात और षड्यंत्रों का भी सामना करना पड़ता है।
हर कदम पर एक नया संकट है, हर निर्णय एक नई परीक्षा।
क्या शक्ति केवल विनाश के लिए होती है… या करुणा ही उसका सर्वोच्च रूप है?चंद्रपुर के युवराज नीलमणि एक ऐसे शासक हैं, जिनकी सबसे बड़ी ताकत उनका हृदय है—पर क्या यह कोमलता उन्हें तोड़ देगी… या उन्हें अजेय बना देगी?एक निर्दोष बालक के प्राण बचाने के लिए लिया गया एक निर्णय, नीलमणि को लोक-निंदा, झूठे आरोपों और अपमान की अग्नि में झोंक देता है।किन्तु उनके पिता का “सिंधु मंत्र” उन्हें सिखाता है—गहराई में ही स्थिरता है, और करुणा में ही वास्तविक शक्ति।उधर, अंधकार का प्रतीक कुटिल रणनीतिकार कालक और निर्दयी सम्राट क्रूरदेव, छल, विश्वासघात और युद्ध की जाल बुन रहे हैं।मित्रता के पीछे छिपा विश्वासघात, विष से भरी नदियाँ, और एक ऐसा शत्रु जो भावनाओं को कमजोरी मानता है—इन सबके बीच नीलमणि को सिद्ध करना है कि वे “मोम का पुतला” नहीं, बल्कि एक अभेद्य ढाल हैं।जब शैलपुर की राजकुमारी प्रवरा एक अद्भुत “बुद्धि का व्यूह” रचती है—जहाँ जीत बल से नहीं, बल्कि विचार, धैर्य और संवेदना से मिलती है—तब नीलमणि के सामने सबसे बड़ी परीक्षा खड़ी होती है।और यहीं से आरंभ होता है—प्रेम और कर्तव्य का संघर्षरणनीति और करुणा का अद्वितीय संगमऔर “त्रिशक्ति” के उदय की महागाथाजहाँ हर निर्णय केवल युद्ध नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करता है।✨ इस पुस्तक में आपको मिलेगा:✔ पौराणिकता और आधुनिक रणनीति का अनोखा संगम✔ बुद्धि बनाम बल का रोमांचक संघर्ष✔ गहरे भावनात्मक और दार्शनिक संवाद✔ प्रेम, विश्वासघात और आत्म-परिवर्तन की प्रेरक कथा
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