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शैलबाला शतक (स्तुति काव्य)

स्तुति काव्य
Prem Narayan Pankil
Type: Print Book
Genre: Poetry, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹95 + shipping
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Description of "शैलबाला शतक (स्तुति काव्य)"

शैलबाला शतक भगवती पराम्बा के चरणों में वाक् पुष्पोपहार है। यह स्वतः के प्रयास का प्रतिफलन हो ऐसा कहना अपराध ही होगा। उन्होंने अपना स्तवन सुनना चाहा और यह कार्य स्वतः सम्पादित करा लिया। यह उक्ति सार्थक लगी-जेहि पर कृपा करहिं जन जानी/कवि उर अजिर नचावहिं बानी।" शैलबाला शतक के प्रारम्भ में माता के रौद्र रूप का अष्टक विलसित है किन्तु वहाँ क्रोध की आग नहीं करुणा का दूध बह रहा है- पंकिल की पीठ पर हँथोरि अम्ब फेरि फेरि बाँटा कर दुलार दीन बेटे की चिरौरी है। अँचरा की ओट में छिपे शिशु के मन को रखने के लिए भवानी का यह लीला विलास अपने आप में शैलबाला शतक की नसों में फड़कता हुआ शोणित है। यह शतक वह निर्माल्य है जिसे माँ ने अपने हाथों से अपने बेटे को खिलाया है और शेष बचे वात्सल्य को अशेष कर दिया है। यह शतक उन्हीं के चरणों में इस भाव से अर्पित है कि १०८ माला के मनके माँ की आराधना पूरी करें और इस जपमालिका को अपने हाथों से स्फुरित और अभिमंत्रित करें। शैलबाला शतक वह शतदल है जो माँ के चरणों में बिछकर निहाल हो गया है। पुनश्च अपनी अज्ञता और उनकी दयालुता को स्मरण करके यही कहना है-’एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु’।

About the author(s)

वाराणसी जनपद के पूर्ववर्ती सीमा में स्थित ग्रामीण अंचल के छोटे से गाँव भटपुरवा में जन्म। जीवन के १० वर्ष शिक्षा सम्पादन में बिहार के बक्सर अंचल एवं पाटलिपुत्र में बीते। बी०ए० आनर्स (अंग्रेजी), एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वाराणसी की नागरी प्रचारिणी सभा में एक वर्ष से अधिक की अवधि तक हस्तलिखित संस्कृत ग्रंथों के अनुक्रम एवं परिशिष्ठ लेखन का कार्य। एल०टी० एवं साहित्यरत्न की उपाधि से संयुक्त। पुनः चन्दौली जनपद के सकलडीहा इण्टरमीडिएट कालेज में अध्यापन। अद्यावधि अंग्रेजी प्रवक्ता के कार्य का सम्पादन करते हुए सेवा से अवकाश। साहित्य में काव्य रचनाओं का प्रणयन, यथा ’टेर रहा है मुरलीधर’, ’नौमि गोपाल बालम्’, ’करो भक्ति जिज्ञासा’, गीता भावानुवाद, गीतांजलि काव्यानुवाद, सौन्दर्य लहरी काव्यानुवाद आदि का प्रणयन। लोकभाषा भोजपुरी के क्षेत्र में लोकगीतों का सृजन एवं शैलबाला शतक जैसी काव्य-कृति की रचना। एकांकी नाटकों का मंचानुकूल सृजन। अवकाशोपरांत भी आलोचना एवं समीक्षा कार्यों में संलग्न।

Book Details
Publisher: Himanshu Kumar Pandey
Number of Pages: 47
Dimensions: 5"x7"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Saddle Stitched)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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