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फिर वही कोहरा

Priyanshu Sunil Sinha
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Horror
Language: Hindi
Price: ₹255 + shipping
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Description

फिर वही कोहरा
भय के जन्म पर आधारित एक मनोवैज्ञानिक हॉरर उपन्यास है।

एक साधारण-से दिखने वाले गाँव में सब कुछ पहले जैसा ही था—बच्चों की हँसी, शाम की शांति और रात के अँधेरे में सुनाई देने वाली कहानियाँ। लेकिन धीरे-धीरे कुछ बदलने लगा। पहले एक अफ़वाह फैली, फिर एक अजीब-सी बेचैनी लोगों के भीतर घर करने लगी। किसी ने कहा कि कब्रिस्तान में किसी को देखा गया है। किसी ने कहा कि धुंध में कोई चल रहा था। और फिर—लोगों ने एक-दूसरे पर भरोसा करना भी कम कर दिया।

यहाँ भय अचानक नहीं आता। वह धीरे-धीरे फैलता है—बातों में, शक में, और लोगों के मन में। अफ़वाहें सच लगने लगती हैं, रस्में सुरक्षा बन जाती हैं, और वास्तविकता तथा कल्पना के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है।

यह कहानी किसी राक्षस से लड़ने की नहीं है।
यह उस क्षण की कहानी है जब डर जन्म लेता है—और धीरे-धीरे पूरे गाँव को अपनी गिरफ्त में ले लेता है।

भाग एक: उस यात्रा का पहला कदम है, जहाँ भय केवल महसूस नहीं किया जाता—बल्कि धीरे-धीरे जीवित हो उठता है।

About the Author

प्रियांशु सुनील सिन्हा एक लेखक और कहानीकार हैं, जिनकी लेखनी में डर, रहस्य और मानव मन की गहराई को बयान करने की खासियत है। उन्होंने अपनी लेखन यात्रा छोटी-छोटी कहानियों से शुरू की और धीरे-धीरे उनका अंदाज़ लंबे, मनोवैज्ञानिक और रहस्यमय कथानकों तक पहुँच गया।

प्रियांशु का लेखन केवल डर पैदा करने तक सीमित नहीं है; वह पाठकों के अंदर छुपी भावनाओं, संदेह और जिज्ञासा को जगाने में भी माहिर हैं। उनकी कहानियों में अक्सर गहरी मानसिक झलक, हल्का-सा काला हास्य और प्रतीकात्मकता देखने को मिलती है, जो पाठकों को सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती है।

वे मानते हैं कि कहानी सिर्फ घटनाओं का सिलसिला नहीं होती, बल्कि एक अनुभव है—एक ऐसा अनुभव जो पढ़ते समय आपको भीतर तक झकझोर दे।

Book Details

Number of Pages: 89
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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