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आज विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बन चुका है। इसके बावजूद, अधिकांश लोग बिना पर्याप्त समझ और तैयारी के इस बंधन में बंध जाते हैं।
"सजग विवाह" इसी अधूरेपन को दूर करने का एक प्रयास है। यह पुस्तक विवाह से पहले और बाद में आने वाली भावनात्मक, मानसिक, सामाजिक और व्यावहारिक चुनौतियों को सरल भाषा में समझाती है।
यह पुस्तक उन युवक-युवतियों, दंपतियों और माता-पिता के लिए है, जो विवाह को केवल निभाना नहीं, बल्कि समझकर जीना चाहते हैं।
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