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'वो शाम की चाय' एक भावनात्मक काव्य-संग्रह है, जो माँ-बेटी के रिश्ते, अनकही बातों और सुकून भरी शामों को शब्द देता है। यह किताब उन पलों की कहानी है, जहाँ चाय सिर्फ़ एक आदत नहीं रहती, बल्कि साथ, समझ और अपनापन बन जाती है।
इन कविताओं में एक बेटी अपनी माँ के अकेलेपन, त्याग और मौन प्रेम को महसूस करती है—और चाय के बहाने उनसे जुड़ने की कोशिश करती है। हर कविता एक ठहराव है, एक एहसास, जो पाठक को अपनी ही यादों और रिश्तों की ओर लौटने पर मजबूर करता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है, जो रिश्तों की गर्माहट, सादगी और भावनात्मक गहराई को महसूस करना चाहते हैं—एक शांत, आत्मीय और सुकून देने वाला अनुभव।
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