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Jute aur Jamana

"एक अनकहे साथी की ज़ुबानी, ज़माने का सच"
Saksham Mishra
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹200 + shipping
This book ships within India only.
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Description

जूते और जमाना: एक खामोश गवाह, एक अनकहा सच
"दुनिया अक्सर पैरों की धूल देखती है, लेकिन उन पैरों के नीचे दबे 'साथी' की सिसकियाँ नहीं सुनती।"

यह कहानी किसी इंसान ने नहीं लिखी, बल्कि इसे जीया है उस चमड़े के एक टुकड़े ने, जिसे एक कारखाने की भट्टी में तपाकर 'जूते' का आकार दिया गया था। वह शोरूम के ठंडे काँच के पीछे से गुज़रते हज़ारों चेहरों को देखता था, लेकिन उसे इंतज़ार था एक ऐसे 'राही' का, जिसके इरादे चट्टान की तरह मज़बूत हों।

तभी उसकी मुलाकात होती है उस नौजवान से, जिसकी जेब खाली थी पर आँखों में मंज़िलों के ख्वाब थे। यह किताब सुमित... नहीं, बल्कि उस गुमनाम संघर्षी की दास्तान है, जिसका मज़ाक ज़माने ने उसके फटे झोले और टूटी चप्पलों को देखकर उड़ाया था।

इस रहस्यमयी सफर में आप जानेंगे:
फर्श से अर्श तक: कारखाने की धूल से लेकर मुशायरे के आलीशान मंच तक का वो सफर, जहाँ पसीना और स्याही एक हो जाते हैं।

अदृश्य वफादारी: जब दुनिया काबिलियत से पहले कपड़ों की चमक देखती थी, तब उस 'खास ब्रांड' के जूते ने उसके गिरते आत्मविश्वास को थामे रखा।

पहचान का संकट: क्या सफलता के शिखर पर पहुँचकर वह युवा शायर अपने उस 'पुराने साथी' को भूल जाएगा, जिसने तपती सड़कों पर खुद घिसकर उसके पैरों के छालों को बचाया था?

लेखक सक्षम मिश्रा की यह मर्मस्पर्शी कृति आपको अहसास कराएगी कि असली कीमत जूतों के 'ब्रांड' की नहीं, बल्कि उस 'वफादारी' की होती है जिसका कोई मोल नहीं लगाया जा सकता।

"एक ऐसा साथी, जो बोल नहीं सकता... पर जिसके बिना सफलता की कहानी अधूरी है।"

About the Author

लेखक परिचय: सक्षम मिश्रा
साहित्य के समंदर में अपनी स्याही से नई लहरें पैदा करने वाले सक्षम मिश्रा आज के दौर के एक विलक्षण और प्रखर युवा रचनाकार हैं। 21 जून 2009 को जन्मे सक्षम ने महज़ 17 वर्ष की उस किशोर आयु में वह दार्शनिक परिपक्वता हासिल कर ली है, जिसे पाने में अक्सर एक उम्र गुज़र जाती है। उनकी लेखनी केवल शब्दों का जाल नहीं, बल्कि जीवन के अनकहे संघर्षों और सूक्ष्म संवेदनाओं का आईना है।

सक्षम की इस गौरवमयी साहित्यिक यात्रा की नींव उनके माता-पिता, श्रीमती प्रीती मिश्रा एवं श्री संदीप मिश्रा के अटूट विश्वास और संस्कारों पर टिकी है। उनके मार्गदर्शन ने ही सक्षम की कल्पनाओं को पंख दिए और उन्हें निरंतर सृजन की प्रेरणा दी।

महज़ 17 साल के इस सफर में सक्षम अब तक तीन महत्वपूर्ण कृतियाँ— ‘संमोहम’, ‘शायराना अंदाज़’ और अब ‘जूते और जमाना’—साहित्य जगत को समर्पित कर चुके हैं। उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बहुत ही सरल भावों के जरिए समाज की कड़वी सच्चाइयों और 'दिखावे' की संस्कृति पर गहरी चोट करते हैं।

सक्षम मिश्रा न केवल एक लेखक हैं, बल्कि उन हज़ारों युवाओं के लिए एक मशाल हैं जो यह मानते हैं कि "हुनर और कामयाबी उम्र की मोहताज नहीं होती।" अपनी अद्भुत कल्पनाशक्ति और शब्दों के जादू से वे पाठकों के दिलों में एक स्थायी जगह बना चुके हैं।

Book Details

Publisher: DIVYANSH
Number of Pages: 67
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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