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फासलें और भी हैं

Shiv Kumar "Sahil"
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹207 + shipping
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Description

फासलें और भी हैं .........
एहसास जब अश्यारोँ में बयां होते हैं तो उन एहसासों की एक अलग दुनिया , एक अलग चेहरा , एक अलग सन्देश सामने आता हैं ! इस किताब में आपको कुछ ऐसे ही सन्देश गज़लों की शक्ल में मिलेंगे ! ग़ज़ल इक सुंदर एहसास हैं इसमें शिकायत , प्रेम , निराशा , खुशी , दर्द , यादें और जिन्दगी का हर रंग मिल जाता हैं ! इस किताब में ऐसे कई रंग हैं , लेखक नें शुरू में ही बड़ी सुंदर बात कही हैं ......

"उनका हंसना मोहब्बत नहीं थी साहिल
तेरे हशर का अंदाजा उन्हें पहले से ही था" !

About the Author

Shiv Kumar "Sahil", 22 years, is a Clerk by profession in Govt. of Himachal Pradesh Irrigation & Public Health Department. This is his first book and he can be reached at shayariorsahil@gmail.com

Book Details

Number of Pages: 164
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

फासलें और भी हैं

फासलें और भी हैं

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1 Customer Review

Showing 1 out of 1
roshanjaswal 4 years, 11 months ago

Re: फासलें और भी हैं

आपकी ग़ज़लें पढ़ी शानदार है आपको साधुवाद। आप हिमाचल से हेैं जानकर अच्‍छा लगा । आशा है आपसे जरूर मुलाकात होगी । पुन: आपको बधाई और साधुवाद।

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