You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
“जहाँ परशुराम बसते हैं” केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और लोकस्मृति का जीवंत दस्तावेज़ है। यह पुस्तक भगवान परशुराम के दिव्य स्वरूप, उनके अवतार उद्देश्य और धर्मस्थापना के संकल्प को शास्त्रीय आधार से समझाते हुए मोकामा की पावन भूमि से जोड़ती है — जहाँ श्रद्धा आज भी सांस लेती है।
मोकामा के मंदिर, गंगा तट, परंपराएँ, उत्सव, यात्राएँ और जनमानस की अटूट आस्था इस कथा में केवल वर्णित नहीं, बल्कि अनुभूत होती हैं। लेखक ने इतिहास, लोकविश्वास और व्यक्तिगत साक्ष्य को इस प्रकार संयोजित किया है कि पाठक स्वयं उस वातावरण का सहभागी बन जाता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है —
जो परशुराम को केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि जीवित चेतना मानते हैं
जो मोकामा की आध्यात्मिक पहचान को समझना चाहते हैं
जो धर्म, संस्कृति और परंपरा के समन्वय को महसूस करना चाहते हैं
यह एक साक्षी कथा है —
जहाँ धर्म केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book जहाँ परशुराम बसते हैं.