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हल्लौर! रिज़वीया सादात के, 410 वर्ष पुराने एक क़स्बे का नाम हैं, जो पूर्व में थारुओं का गढ़ हुआ करता था और तब यह हिलोरा के नाम से जाना जाता था. हल्लौर वास्तव में एक अलग ही दुनिया हैं, जहाँ की संस्कृति, बोली, रहन - सहन और आबादी से अब जुड़ चुकी आबादियों में कहीं भी देखने का मौका नहीं मिल सका. बचपन से ही जहाँ पर पढाई के प्रति रुझान पाया जाता है, इससे इतर जहाँ सबमे सांस्कृतिक विरासत कूट कूट कर भरी हुई है.
मैंने इस कसबे के लोगों में लालित्य प्रेम, साहित्य के प्रति रुझान, कला के प्रति दीवानापन, तथा प्रत्येक विधा के प्रति निपुणता पाई, कि सोंचना पड़ गया, इसे एक पुस्तक में किस प्रकार सहेज सकूँगा! मेरे लिए यह एक चुनौती समान था. काफी सोचने और समझने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि पुस्तक को अध्याय में बाँटा जाए. इस प्रकार कुल 50...
Dear Sultan Ahmad Rizvi (Bhaijaan) I am glad to see your most awaited book Hallaur Itihaas ke Ayine me it is very good initiative taken by you. It must be...
Re: हल्लौर "इतिहास के आईने में"
Greatly appreciated..Had gone through the entire content,captivating right from the first page, really great collection.... Mind blowing !!! already suggested this book on to friends, am sure they will enjoy...