You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
अगर आप एक हत्या के गवाह हों —
तो क्या आप सच बोलेंगे?
या अपनी ज़िंदगी बचाएँगे?
रमेश कुमार — एक साधारण सरकारी कर्मचारी —
एक रात एक हत्या देखता है।
वो hero नहीं है।
वो activist नहीं है।
वो बस एक आदमी है।
लेकिन जब वो सच बोलने का फ़ैसला करता है,
तो उसे सिर्फ़ अपराधियों से नहीं —
बल्कि पूरे सिस्टम से लड़ना पड़ता है।
पुलिस। राजनीति। अदालत।
और सबसे बड़ा दुश्मन — डर।
यह कहानी है एक गवाह की।
एक परिवार की।
और उस कीमत की — जो सच बोलने के लिए चुकानी पड़ती है।
क्योंकि न्याय सिर्फ़ अदालत में नहीं होता —
वो इंसान के अंदर होता है।
आप क्या करते?
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book गवाह.