महराज
इएह थिक जीवन
नाचि रहल छलि वसुधा
पटाक्षेप
बदलि रहल अछि सभकिछु
दीप जरैत रहए
स्वप्नलोक
ढहैत देबाल
यज्ञसेनी
गाछ बजैत छैक
पाथेय
शंखनाद
मातृभूमि
जानकी विजयम्
हम आबि रहल छी
VIDEHA SHIVSHANKAR SRINIVAS SPECIAL
भोरसँ साँझ धरि
प्रीति कारण सेतु बान्हल
प्रीति कारण सेतु बान्हल Redefining Maithili