भोरसँ साँझ धरि
स्वर्ग एतहि अछि
महराज
जयतु जानकी
कथा अखन बाँकी अछि
हिन्दी साहित्य और हाशिया विमर्श
विविध प्रसंग
फसाद
समाधान
प्रलयक परात
बीति गेल समय
न्याय की गुहार
नाचि रहल छलि वसुधा
राष्ट्र मंदिर
सीमाक ओहि पाार
दीप जरैत रहए
नमस्तस्यै
पटाक्षेप
सूर्यपुत्र
हिन्दी साहित्य: विमर्शों की ज़मीन