साहित्य के बिना, मैं केवल मांस का एक निर्जीव टुकड़ा हूँ।
विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक
प्रकृति, ज्ञान और मनुष्य
भारत में चुनावी राजनीति: सत्ता, अस्मिता और जनादेश
सरपंच गणित: गांव के वोटों की चाल, दिशा, और गिनती से सत्ता तक!: गांव की राजनीति, रणनीति और सत्ता की असली कहानी