बाद में सुनता हूँ, पापा
कमरा नंबर 404
पंचतत्व ९ : अनंत
उल्टी तरफ का नीला
दूसरी सुबह
जब बारिश ने घर चुना
नींद खुलने से पहले
दीवार के उस पार सुबह
पानी की पहली सीढ़ी
आँगन में ठहरी सर्दी
उस शाम कोई नहीं हारा
अपरिमेय
कमरा अभी खाली है
पीतल की दोपहर
ज्वार
दो शहरों की धूप
तेरे हिस्से का इश्क़
जब नदियाँ ऊपर उठीं
टूटे आकाश के रास्ते
जहाँ रास्ते मिलते हैं
अंतिम धारा
विराम का रहस्य
खिड़की के उस पार
इस तस्वीर में मत आना