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'भटका हुआ सुर' उन भटकते कदमों की एक ऐसी दास्तान है, जो एक निवाला, एक पनाह और एक प्यार भरी थपकी की तलाश में अपनी उम्र बिता देते हैं। यह किताब आपको लखनऊ के उन अनकहे कोनों की सैर कराएगी, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
एक ऐसी किताब, जिसे पढ़ने के बाद आप अपनी खिड़की से बाहर देखना कभी नहीं भूलेंगे, और शायद आप उन आँखों में झाँक पाएंगे जिन्हें अब तक आपने सिर्फ 'बेजुबान' समझा था।
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