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जीना चाहता हूँ

अंकुर
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹549 + shipping
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Description

जीना चाहता हूँ

कभी-कभी ज़िंदगी से हमें कोई बड़ी शिकायत नहीं होती, बस मन के भीतर एक छोटी-सी आवाज़ उठती है—
मैं सच में जीना चाहता हूँ।

यह किताब उन्हीं अनकहे सवालों, अधूरी भावनाओं, रिश्तों, यादों, उम्मीदों और उन संघर्षों की कहानी है, जिन्हें हम अक्सर अपने भीतर ही दबाकर आगे बढ़ते रहते हैं।

जीना चाहता हूँ ज़िंदगी को किसी नियम या सूत्र में बाँधने की कोशिश नहीं करती। यह बस उन पलों के साथ बैठती है, जहाँ हम खुद से सवाल करते हैं—मैं क्या चाहता हूँ? मैं किसके लिए जी रहा हूँ? क्या हर चीज़ को पाने की कोशिश में मैंने जीना तो नहीं छोड़ दिया?

कभी एक कमरे की खामोशी में, कभी समुद्र की लहरों में, कभी किसी पुराने रिश्ते की याद में और कभी किसी अपने के साथ बिताए छोटे-से पल में—ज़िंदगी हमें बार-बार समझाती है कि खुश रहने के लिए हमेशा बहुत कुछ होना ज़रूरी नहीं होता।

यह किताब उन लोगों के लिए है जिन्होंने कभी किसी को खोया है, किसी का इंतज़ार किया है, किसी रिश्ते को बचाने की कोशिश की है, खुद को दूसरों की उम्मीदों में तलाशा है या भीड़ के बीच खड़े होकर भी अकेलापन महसूस किया है।

एक कंप्यूटर साइंस के शिक्षक और लेखक के दृष्टिकोण से लिखी गई यह किताब कोड और ज़िंदगी के बीच एक अनोखा रिश्ता तलाशती है—जहाँ कुछ समस्याओं का समाधान मिल जाता है, कुछ का नहीं; कुछ चीज़ें दोबारा लिखी जा सकती हैं, लेकिन कुछ यादें हमेशा के लिए हमारी कहानी का हिस्सा बन जाती हैं।

शायद ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह नहीं कि सब कुछ हमारे मन के अनुसार हो जाए, बल्कि यह है कि हम अपूर्णताओं के साथ भी आगे बढ़ना सीखें।

क्योंकि ज़िंदगी हमेशा आसान होने का वादा नहीं करती।
लेकिन शायद वह हमें एक और मौका ज़रूर देती है—
खुद को समझने का, कुछ छोड़ देने का, किसी को अपनाने का और फिर से कहने का…

हाँ, मैं जीना चाहता हूँ।

About the Author

अंकुर यादव कंप्यूटर साइंस के शिक्षक, शोधार्थी और लेखक हैं। तकनीक और तर्क की दुनिया से जुड़े होने के बावजूद उनका मन हमेशा से जीवन, रिश्तों, भावनाओं और मानवीय अनुभवों को समझने की ओर आकर्षित रहा है।

उनका मानना है कि जिस तरह कंप्यूटर की दुनिया में हर समस्या का कोई न कोई समाधान खोजने की कोशिश की जाती है, उसी तरह जीवन भी हमें हर परिस्थिति से कुछ सीखने का अवसर देता है। लेकिन जीवन की कुछ भावनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें किसी कोड, तर्क या सूत्र में नहीं बाँधा जा सकता—उन्हें केवल महसूस किया जा सकता है।

जीना चाहता हूँ इसी सोच और अनुभवों से जन्मी एक भावनात्मक यात्रा है। इस पुस्तक के माध्यम से अंकुर ने उन सवालों, रिश्तों, यादों, संघर्षों और उम्मीदों को शब्द देने की कोशिश की है, जिन्हें हममें से बहुत से लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन कह नहीं पाते।

उनकी लेखनी का उद्देश्य केवल लिखना नहीं, बल्कि पाठक को कुछ क्षण अपने भीतर झाँकने, अपने जीवन को समझने और शायद फिर से मुस्कुराने का एक कारण देना है।

क्योंकि कभी-कभी हमें ज़िंदगी बदलने की नहीं,
बस उसे एक नए नज़रिए से देखने की ज़रूरत होती है।

Book Details

ISBN: 9789334505610
Number of Pages: 239
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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