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दिमाग, दिल और धर्म

हम क्या मानते हैं, क्यों क्रोधित होते हैं और अच्छे क्यों बनते हैं
अनूप पचौरी
Type: Print Book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹300 + shipping
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Description

# दिमाग, दिल और धर्म
**हम क्या मानते हैं, क्यों क्रोधित होते हैं और अच्छे क्यों बनते हैं**

हम जो मानते हैं, क्या वह सच होता है? क्या क्रोध हमेशा बुरा होता है? और क्या नैतिक बनने के लिए धर्म का होना ज़रूरी है?

ये तीन सवाल मानव जीवन, हमारी सोच और हमारे समाज को समझने के तीन अलग-अलग रास्ते खोलते हैं।

**दिमाग, दिल और धर्म** में अनूप पचौरी भारतीय परंपराओं, दर्शन, मनोविज्ञान और आधुनिक विज्ञान के सहारे ऐसे सवालों की पड़ताल करते हैं, जिनका सामना हम अपने रोज़मर्रा के जीवन में करते हैं।

इस पुस्तक की यात्रा चार प्रमुख विषयों से होकर गुजरती है:

- **बड़े नाम, बड़े सवाल:** क्या किसी महापुरुष, विशेषज्ञ या धर्मग्रंथ का कथन अपने आप में प्रमाण बन जाता है? जानिए तर्क, प्रमाण और स्वतंत्र चिंतन का महत्त्व।
- **गुस्सा: दुश्मन या ताकत?:** क्रोध कैसे विनाश का कारण बनता है और कब अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति बन सकता है? समझिए क्रोध, बैर, करुणा और आत्मसंयम के बीच का अंतर।
- **हम हँसते क्यों हैं?:** मज़ाक, हास्य और मनोविज्ञान के माध्यम से जानिए कि हमारी भावनाएँ और मानसिक प्रक्रियाएँ हमारे व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं।
- **अच्छाई कहाँ से आती है?:** क्या सहानुभूति, न्याय-बोध और दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति केवल धर्म से पैदा होती है, या उनकी जड़ें जीवविज्ञान और सामाजिक जीवन में भी हैं?

यह पुस्तक न तो परंपरा को आँख मूँदकर स्वीकार करने का आग्रह करती है, न ही हर विश्वास को बिना जाँच खारिज करने का। इसका उद्देश्य पाठक को प्रश्न पूछने, दावों को परखने और अपने विचार स्वयं बनाने के लिए प्रेरित करना है।

यदि आप धर्म, दर्शन, मानव व्यवहार, तर्क और नैतिकता को एक नए दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपको अपने विश्वासों और धारणाओं पर दोबारा विचार करने का अवसर देगी।

**क्योंकि ज्ञान की शुरुआत केवल उत्तर मिलने से नहीं, बल्कि सही सवाल पूछने से होती है।**

About the Author

**अनूप पचौरी** लेखक एवं शिक्षक हैं, जिनकी लेखनी भारतीय दर्शन, विज्ञान, तर्कशीलता और मानव व्यवहार के अंतर्संबंधों की पड़ताल करती है। वे परंपरागत मान्यताओं को तर्क और प्रमाण की कसौटी पर परखते हुए पाठकों को स्वतंत्र चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं। उनका उद्देश्य केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि सवालों के माध्यम से सोचने की नई दृष्टि विकसित करना है।

Book Details

Publisher: Self-Published
Number of Pages: 139
Dimensions: 5.82"x8.28"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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