You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution

Add a Review

मीनाक्षी

महाकाव्य की विस्मृत नारी
अनिल कुमार वर्मा
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹399 + shipping
Price: ₹399 + shipping
Dispatched in 5-7 business days.
Shipping Time Extra

Description

पंचवटी की उस एक घटना को सबने पढ़ा है। उसके पहले और बाद की मीनाक्षी को किसी ने नहीं जाना।

मीनाक्षी — महाकाव्य की विस्मृत नारी रावण की बहन की एक कल्पित, प्रथम-पुरुष आत्मकथा है। वह स्वयं को स्त्री, विदुषी, पत्नी, बहन और राक्षसी के रूप में पहचानती है—लेकिन इनमें से कोई भी पहचान उसकी पूरी कहानी नहीं कहती।

उपन्यास हमें स्वर्णमयी लंका के उस संसार में ले जाता है जहाँ मीनाक्षी का बचपन बीतता है। वहाँ उसका एक विद्वान पिता है, एक महत्वाकांक्षी भाई रावण है और एक सौम्य, स्नेहशील भाई कुम्भकर्ण है। इसी संसार में उसे विद्युज्जिह्वा मिलता है—एक ऐसा पुरुष जो उसकी बुद्धि को सुनता है, उसके विचारों का सम्मान करता है और उसे अपने स्वतंत्र अस्तित्व के साथ स्वीकार करता है।

लेकिन प्रेम और स्वतंत्रता का यह संसार राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा की भेंट चढ़ जाता है। पति की मृत्यु के बाद मीनाक्षी दण्डकारण्य में अपना जीवन नए सिरे से बनाती है। फिर एक दिन उसकी भेंट राम, सीता और लक्ष्मण से होती है। अग्नि के पास भोजन, विचारों का आदान-प्रदान और दो स्त्रियों के बीच जन्म लेती अप्रत्याशित समझ—इन सबके बीच वह घटना आकार लेती है जिसे परंपरा ने उसके पूरे जीवन की पहचान बना दिया।

पर क्या किसी स्त्री का संपूर्ण जीवन उसकी एक इच्छा, एक अपमान या एक घाव में समेटा जा सकता है?

यह उपन्यास रामायण का विरोध नहीं करता। यह उसके एक मौन की पड़ताल करता है। यहाँ रावण केवल खलनायक नहीं, बल्कि प्रेम करने वाला भाई और विनाशकारी सम्राट भी है। राम केवल आदर्श पुरुष नहीं, बल्कि अपने आदर्शों की सीमाओं से जूझते मनुष्य भी हैं। सीता केवल सहनशील पत्नी नहीं, बल्कि अपनी बुद्धि, विवेक और स्वतंत्र दृष्टि वाली स्त्री हैं। और मीनाक्षी केवल शूर्पणखा नहीं—वह एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसकी कहानी महाकाव्य के बाद भी समाप्त नहीं होती।

नाम उसने रखा था। इतिहास ने उसे कुछ और बना दिया।

यदि आपने कभी सोचा है कि किसी महाकाव्य की कथा उस व्यक्ति की आँखों से कैसी दिखाई देती है, जिसके बारे में सबने लिखा, लेकिन जिसकी बात किसी ने नहीं सुनी, तो यह उपन्यास आपके लिए है।

About the Author

अनिल कुमार वर्मा भारतीय इस्पात उद्योग में तीन दशकों से अधिक समय तक अनुसंधान एवं विकास से जुड़े रहे हैं। वे पदार्थ विज्ञान में विशेषज्ञ हैं और प्रौद्योगिकी तथा मानवीय अनुभवों के बीच के संबंधों में विशेष रुचि रखते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने लेखन को अपना दूसरा जीवन-पथ बनाया। उनकी अनेक प्रकाशित पुस्तकों में इतिहास, जीवनी, विज्ञान और पौराणिक पुनर्कथन प्रमुख विषय रहे हैं। मीनाक्षी में वे रामायण की एक उपेक्षित आवाज़ को साहित्यिक और मानवीय दृष्टि से पुनर्सृजित करते हैं।अनिल कुमार वर्मा इतिहास, भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं के उन अनकहे पक्षों में विशेष रुचि रखते हैं, जिनके पीछे समय के साथ अनेक प्रश्न और संभावनाएँ छिप गई हैं। उनकी लेखकीय दृष्टि प्रचलित आख्यानों को केवल दोहराने के बजाय उनके पात्रों, उनके अंतर्द्वंद्वों और उनके मानवीय पक्षों को समझने का प्रयास करती है।
उनकी कृति ‘मीनाक्षी — महाकाव्य की विस्मृत नारी’ इसी दृष्टिकोण का परिणाम है। इस उपन्यास में वे उस स्त्री की कथा को केंद्र में लाते हैं, जिसे प्रचलित रामायण परंपरा में प्रायः शूर्पणखा के नाम से जाना जाता है। लेखक उसे एक नए दृष्टिकोण से देखते हुए उसके प्रेम, पीड़ा, स्वाभिमान, स्वतंत्रता और जीवन के संघर्षों को स्वर देने का प्रयास करते हैं।

अनिल कुमार वर्मा का मानना है कि प्रत्येक ऐतिहासिक और पौराणिक पात्र को समझने के लिए उसके कार्यों के साथ-साथ उसकी परिस्थितियों, भावनाओं और दृष्टिकोण को भी जानना आवश्यक है। उनके लिए साहित्य अतीत को नए प्रश्नों के साथ देखने और परिचित कथाओं में छिपे मानवीय अनुभवों को उजागर करने का माध्यम है।

‘मीनाक्षी’ के माध्यम से उनका प्रयास किसी महाकाव्य को दोहराना नहीं, बल्कि उसकी छाया में रह गई एक स्त्री को अपनी कहानी कहने का अवसर देना है।

Book Details

Publisher: Anil Kumar Verma Publishing
Number of Pages: 100
Dimensions: 5.51"x8.50"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

मीनाक्षी

मीनाक्षी

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book मीनाक्षी.

Other Books in Literature & Fiction, Religion & Spirituality

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.