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फ़ज़ीहत-ए-मुल्क

(एक बागी पत्रकार का 'ग़लत कैटलॉग')
अनिकेत यादव
Type: Print Book
Genre: Satire
Language: Hindi
Price: ₹168 + shipping
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Description

फ़ज़ीहत-ए-मुल्क: शर्मा जी की फ़ज़ीहत
(एक बागी पत्रकार का 'ग़लत कैटलॉग')
​क्या आपने कभी इस बात पर ग़ौर किया है कि इस मुल्क में एक 'आम आदमी' होना अपने आप में किसी 'डार्क कॉमेडी' का मुख्य किरदार होने जैसा है? अगर नहीं, तो मिलिए संकट शर्मा से!
​'फ़ज़ीहत-ए-मुल्क' महज़ एक कहानी नहीं है; यह हम सबके रोज़मर्रा के संघर्षों, झल्लाहटों और सिस्टम के गाल पर मारा गया एक जोरदार, व्यंग्यात्मक तमाचा है। यह उस आम हिंदुस्तानी का 'ग़लत कैटलॉग' है, जिसकी अपनी निजी अर्थव्यवस्था हमेशा आईसीयू (ICU) में रहती है।
​जब शर्मा जी अपने 'झलझले कुर्ते' और 'पुरानी डायरी' के साथ सड़क पर निकलते हैं, तो उनका स्वागत 'गड्ढों के मुकम्मल विकास' से होता है। लोकतंत्र की ओवरलोड सवारी यानी 'टेम्पो-ए-जम्हूरियत' में उन्हें मुफ्त का 'गुटखा-स्नान' नसीब होता है। मुहब्बत की कैंटीन में 'चटनी-स्नान' से लेकर, सड़क पर 'सांड-ए-आज़म' के खतरनाक शक्ति-प्रदर्शन और 'सियासी कुत्तों के महागठबंधन' तक—शर्मा जी की ज़िन्दगी का हर दिन इस देश की सड़ी-गली व्यवस्था का एक नया चैप्टर है।
​'बैल-बुद्धि' के बाज़ार में ज्ञान बाँटने वाले अज्ञानियों के बीच फँसे संकट शर्मा की ये त्रासदियाँ आपको ठहाके लगाने पर मजबूर कर देंगी। लेकिन ज़रा संभलकर! क्योंकि हँसते-हँसते अचानक आपको सीने में एक चुभन भी महसूस होगी... जब आपको यह अहसास होगा कि जिन पन्नों पर आप हँस रहे हैं, दरअसल वो शर्मा जी की नहीं, बल्कि आपकी अपनी ही ज़िन्दगी की मुकम्मल फ़ज़ीहत है।
​अनिकेत यादव की चुभती हुई कलम और ठेठ बागी मिज़ाज से बुना गया यह राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य, आपको व्यवस्था के उस आईने के सामने खड़ा कर देगा, जहाँ से नज़रें चुराना नामुमकिन है।

About the Author

लेखक का परिचय
​अनिकेत यादव
​एक बागी कलमकार, एक ऐसी आवाज़ जिसने हमेशा सामाजिक कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ सवाल उठाए हैं। अनिकेत यादव के लेखन में वह पैनापन है, जो समाज की कड़वी सच्चाइयों को आईना दिखाता है और पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है।
​'चारबाग से हज़रतगंज तक' के रूप में उनका एक सफल उपन्यास पहले ही प्रकाशित हो चुका है, जिसने पाठकों और समीक्षकों द्वारा सराहा गया। 'फ़ज़ीहत-ए-मुल्क' उनके लेखन का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ उन्होंने व्यंग्य के माध्यम से राष्ट्र की वर्तमान स्थिति और समस्याओं को उजागर किया है।
​वे मानते हैं कि कलम सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और न्याय के लिए लड़ने के लिए किया जाना चाहिए। 'फ़ज़ीहत-ए-मुल्क' उनकी सामाजिक जिम्मेदारी और लेखन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

Book Details

Publisher: Aniket yadav
Number of Pages: 60
Dimensions: 5"x7"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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