अनिकेत मूल रूप से 'बागी' बलिया की मिट्टी से ताल्लुक रखते हैं और लखनऊ की हवाओं से उनका गहरा नाता है। पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के छात्र होने के नाते, किताबों से उनका इश्क़ बहुत पुराना है। जौन एलिया की शायरी में सुकून तलाशने वाले अनिकेत को आम लोगों की उन कहानियों को पन्नों पर उतारना पसंद है, जो अक्सर समाज के शोर में अनकही रह जाती हैं। वे मानते हैं कि सच्ची कहानियाँ वही हैं, जो किसी के भी दिल का दरवाज़ा खटखटा कर उसे रुला सकें। और उनमें समाज के लिए कोई संदेश हो।
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