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हार गए पापा

अनिलचंद्र ठाकुर
Type: Print Book
Genre: Biographies & Memoirs
Language: Hindi
Price: ₹350 + shipping
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Description

यह कहानी एक कवि की है जो अपनी नौकरी और अपने गाँव के बीच फंसा हुआ है। कविजी, जो अब चालीस की उम्र पार कर चुके हैं, दो बेटे और एक बेटी के पिता हैं। उनकी पत्नी सुंदर, समझदार और तेज़ है, लेकिन एक छोटी सी बात पर दोनों के बीच अनबन रहती है।

कविजी पिछले पंद्रह सालों से भारत सरकार के एक प्रतिष्ठान में काम कर रहे हैं, लेकिन इस नौकरी ने उन्हें कभी संतुष्टि नहीं दी। वे अक्सर नौकरी छोड़ने का विचार करते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाते। उनकी आत्मा हमेशा अपने गाँव की ओर खिंचती है, जहाँ की यादें उन्हें जीवित रखती हैं।

गाँव की यादें उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। वहाँ के बाग, तालाब, कोयल की कूक, खेतों में काम करती मजदूरिनें, और मेले की रौनक उन्हें हमेशा आकर्षित करती हैं। लेकिन नौकरी की मजबूरियों ने उन्हें अपने गाँव से...

About the Author

अनिलचंद्र ठाकुर: जीवन और साहित्यिक योगदान

अनिलचंद्र ठाकुर (१३ सितम्बर १९५४ - २ नवम्बर २००७) हिंदी और मैथिली साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक थे, जिनका लेखन जीवन की गहराइयों और सामाजिक संघर्षों को बखूबी छूता था। उनका जन्म बिहार के कटिहार जिले के समेली गांव में एक साधारण परिवार में हुआ, लेकिन उनके असाधारण लेखन ने उन्हें साहित्य की दुनिया में एक विशेष पहचान दिलाई। उन्होंने 1982 में हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर किया और उसके बाद साहित्यिक यात्रा शुरू की। उनके लेखन का फलक व्यापक था—हिंदी, मैथिली, अंगिका और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में समान रूप से लेखनी चलाते थे।

अनिलचंद्र जी ने अपने जीवन के अनुभवों को इतनी सहजता और संवेदनशीलता के साथ शब्दों में ढाला कि उनके पाठक उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते थे। उनकी कहानियाँ जीवन के सामान्य संघर्षों, परिवार, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित थीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी 'हर गए पापा' ने...

Book Details

Publisher: अपूर्व चन्द्रम
Number of Pages: 171
Dimensions: 8.27"x11.69"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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