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र साल हम नौ दिन व्रत रखते हैं, माता की चौकी सजाते हैं, पर क्या हम सच में माँ को जानते हैं? "निस्वार्थी नवरात्रि दर्शन 2026" इसी सवाल का उत्तर देने का एक सरल और भावपूर्ण प्रयास है।
इस पुस्तक में 236 पद हैं, जो लोकगीत की तरह तुकांत शैली में लिखे गए हैं, ताकि इन्हें पढ़ने के साथ गाया भी जा सके। हर पद के साथ पाँच पंक्तियों का सरल भावार्थ दिया गया है, ताकि कम पढ़ा-लिखा पाठक भी पूरा अर्थ समझ ले। भाषा सरल हिंदी है, जिसमें हरियाणवी की मिठास है।
पुस्तक में क्या मिलेगा:
नवरात्रि का अर्थ और आदि शक्ति के नौ स्वरूपों का परिचय
हर देवी के नाम का रहस्य, स्वरूप, वाहन और अस्त्र-शस्त्रों का अर्थ
प्रत्येक देवी की पौराणिक कथा
पूजा विधि, प्रिय रंग, फूल, भोग और दान की मान्यताएँ
ध्यान मंत्र और बीज मंत्र (108 बार जप की विधि सहित)
हर देवी का "आज के युग के लिए संदेश", जो माता-पिता और युवाओं के लिए भी है
अंतिम अध्याय (पद 217-233): नौ देवियों का सात चक्रों से संबंध, यानी मूलाधार से सहस्रार तक की यात्रा। माँ कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का सहस्रार चक्र में वास
परिशिष्ट: बीज मंत्र सारणी, चक्र जागरण की सात्विक विधि, नवरात्रि की तिथियाँ और कठिन शब्दों का शब्दकोश
यह पुस्तक किसके लिए है:
नवरात्रि में व्रत और पूजा करने वाले भक्तजन
जो पूजा के साथ उसके पीछे का अर्थ और विज्ञान भी जानना चाहते हैं
योग और चक्र साधना में रुचि रखने वाले पाठक
युवा पीढ़ी और परिवार, जो सरल भाषा में सनातन ज्ञान समझना चाहते हैं
मूल संदेश:
"यह शरीर ही मंदिर है।" बाहर की पूजा तभी सार्थक है, जब भीतर की पूजा जागे। भय से निर्भयता, मलिनता से पवित्रता और अधूरेपन से पूर्णता की ओर, यही इस ग्रंथ का सार है।
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