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निस्वार्थी सारोसार गीता दर्शन (काव्य दर्शन) श्रीमद्भगवद्गीता के अठारह अध्यायों को सरल, काव्यात्मक और लोकभाषा के माध्यम से समझाने का एक विशेष साहित्यिक प्रयास है।
इस पुस्तक में गीता के प्रत्येक अध्याय का गद्य सारोसार, हरियाणवी भजन, भावार्थ तथा साहित्यिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य गीता के गहन दर्शन को ऐसी सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाना है, जिसे सामान्य पाठक भी सहजता से समझ सके।
लेखक ने गीता के दर्शन को हरियाणवी भजनों के रूप में प्रस्तुत किया है। पुस्तक में 18 अध्यायों को 18 स्वतंत्र भजनों के माध्यम से समझाया गया है और प्रत्येक भजन के साथ उसके गूढ़ अर्थ तथा वर्तमान जीवन में उसकी प्रासंगिकता पर साहित्यिक विश्लेषण दिया गया है।
पुस्तक की एक खास विशेषता यह है कि इसमें गीता को केवल दार्शनिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में उपयोगी मार्गदर्शन के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। लेखक ने भाषा को सरल रखा है ताकि विद्यार्थी और सामान्य पाठक भी विषय को आसानी से समझ सकें।
पुस्तक में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों का सार
- प्रत्येक अध्याय का पद एवं व्याख्या
- हरियाणवी भजन
- हरियाणवी भावार्थ
- साहित्यिक विश्लेषण
- अध्यायवार दार्शनिक विचार
- कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष से जुड़े विचार
- गीता के संदेश की वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता
- पारिभाषिक शब्दावली एवं गीता पाठ की फलश्रुति
पुस्तक की विषय-सूची में सभी 18 अध्यायों के साथ गद्य सारोसार, हरियाणवी भजन, भावार्थ और साहित्यिक विश्लेषण को क्रमवार शामिल किया गया है।
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