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इस पुस्कत का द्वितीय अंक रामचरितमानस में अन्तर्हिनित
आध्यात्मिक एवं नैतिक तत्वों का गहन शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत करता है। गोस्वामी
जी ने मानस में अपने छन्दों के माध्यम से आत्म विकास के अनुभव साीर्वभौमिक
चेतना की अनुभूतियों के माध्यम से व्यक्ति की आध्यात्मिक विकास यात्रा के मार्ग को
सुगम, सुखद, सरल एवं व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया है। मनुष्त्य में नैतिक तत्वों के
विकास के लिए विभिन्न विचारकों के अनुसंधान कार्यों के पररप्रेक्ष्य में रामचरितमानस में
उल्लिखित संयोग, संज्ञान, सन्दर्भ और सन्देश का गहन विश्लेषण किया गया है, जो
नैतिकता के मूल्यों, आदर्शों एवं नैतिकता के स्वीकृत सामाजिक मानकों पर आधारित है।
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