You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
क्या हमारी परिस्थितियाँ जीवन को बनाती हैं, या उन परिस्थितियों के प्रति हमारी मान्यताएँ?
‘मान्यता बदलिए, जीवन संवारिए और मुक्ति पाइए’ पाठक को अपनी गहरी मान्यताओं की पहचान करने, उनके प्रभाव को समझने और जागरूकता के साथ उन्हें रूपांतरित करने की दिशा प्रदान करती है। यह पुस्तक सकारात्मक सोच तक सीमित नहीं है; इसमें साक्षीभाव, भगवद्गीता का कर्म-दर्शन, समर्पण, सद्गुरु-कृपा, आत्मचिंतन और अद्वैत-वेदांत के माध्यम से आत्मबोध की यात्रा प्रस्तुत की गई है।
तीन खंडों में विभाजित यह पुस्तक मनुष्य को सीमित पहचान से ऊपर उठकर अधिक संतुलित, उत्तरदायी और जागरूक जीवन जीने की प्रेरणा देती है। शास्त्रीय संदर्भों, आध्यात्मिक अनुभवों, साधना-सूत्रों और आत्मषट्कम् के चिंतन से समृद्ध यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जीवन में वास्तविक आंतरिक परिवर्तन, शांति और आत्मबोध की दिशा खोज रहे हैं।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book मान्यता बदलिए, जीवन संवारिए और मुक्ति पाइए.