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रामप्रसाद, शुरुआती दिन, परिवार से मन-मुटाव, घर से निकाल दिया जाना, दुष्कर मेधावस्था, चल रहा लाजवंती से तकरार और संघर्ष में उलझा परिवार।
लाजवंती, किशोर की बड़ी बेटी, घर के सारे काम देखती आयी, बचपन में सुख न मिला, जवानी में मौत भोग रही है, खून में उबाल है, पर औरत-जात होने का सवाल है।
काशी, समाज की कुरीतियों से जन्मा, अपने ही माँ-बाप की, आँखों का काटा, जिसके चरित्र में कल का भविष्य है! और वर्तमान, लड़कपन्न के गर्त में।
और आखिर में, तुलसी! जिसका काफी कुछ, खुला जिक्र रहा नहीं कभी! पर जलाशय सतह पर जितना शांत दिखता है, भीतर उतनी ही करवटें बदलता है।
और ऐसे-ऐसे किरदार जो बेशक आपके ही जीवन से उठ कर इस उपन्यास में दिख रहे होंगे! और कहीं न कहीं आप खुद को किसी न किसी पात्र में पा रहे होंगे!
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