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पुस्तक विवरण (Book description):
"शोषण और दोहन के विरुद्ध संघर्ष" एक सच्ची कहानी है झारखंड के गुमला जिले के एक गाँव से उठी न्याय की आवाज़ की। सन् 1995 में एक रिश्वत से इनकार करने पर लेखक के पैतृक भूमि से वन विभाग द्वारा साल की 278 लकड़ियाँ जब्त कर ली गईं और बाद में उनका गबन कर लिया गया। इसके बाद शुरू हुई तीस वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर झारखंड उच्च न्यायालय तक। यह पुस्तक संस्मरण, कविता, व्यंग्य, कानूनी दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक विश्लेषण को एक साथ बुनकर ग्रामीण भारत में सत्ता, भ्रष्टाचार और सामान्य व्यक्ति के संघर्ष की एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करती है।
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