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“सरिता की अविरल गूंज” एक ऐसा काव्य संग्रह है, जिसमें कविताएँ मानो एक अविरल धारा की तरह बहती हैं—प्रकृति, स्त्री जीवन, पितृसत्ता और मानवीय चेतना के विविध आयामों को स्पर्श करती हुई।
यह संग्रह लेखिका के लिए केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक आंतरिक यात्रा है—एक ऐसी यात्रा, जिसमें वह चेतना पर पड़े परत-दर-परत जालों को हटाकर भीतर के दर्पण को स्वच्छ करने का प्रयास करती हैं।
इन कविताओं के माध्यम से लेखिका न केवल स्वयं से संवाद स्थापित करती हैं, बल्कि पाठकों को भी उसी दर्पण के सामने खड़ा कर देती हैं—जहाँ वे अपने भीतर झांक सकें।
इस संग्रह में सृजन और संवेदना, दोनों ही जीवन की सांसों की तरह उपस्थित हैं, जो प्रेम, जागरूकता और आत्मबोध की अनुभूति कराते हैं।
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