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महाकाव्य-संस्करण श्रीमद्भगवद्गीता (दिव्य संवाद-जीवन का)

(दिव्य संवाद-जीवन का)
कमलेश तिवाना
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹963 + shipping
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Description

आज दिनाक ०४.०९.२०२६ कृष्ण-जन्मास्टमी के पावन दिवस पर और मेरी पुत्री एवम् पुत्र के भी जन्म-दिवसो के सप्ताह पर इस “महाकाव्य संस्करण श्रीमद्भगवद्गीता” (दिव्य संवाद-जीवन का) का संपूर्ण करना एवं प्रकाशन के लिए तैयार करना मुझे अति विशेष दिवस प्रतीत हुआ है । इस काव्य-कृति के सृजन की यात्रा में मैंने ईश्वर से एक मौन इच्छा जाहिर की थी, कि इस काव्य-कृति के संपूर्ण होने एवम् प्रकाशित होने से पूर्व श्री जग्गनाथ धाम जाने का मुझे अवसर मिले, जो कि मुझे पिछले माह में प्राप्त हुआ ।
मैं योगेश्वर श्रीकृष्ण को कोटि-कोटि नमन करती हूँ, जिनके दिव्य-उपदेश युगों-युगों से मानव जीवन को सत्य, धर्म, कर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाते आये है ।
यह काव्य-कृति मेरे लिए केवल लेखन का कार्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा है । इस यात्रा में मैंने अनुभव किया है, कि श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक शब्द और श्लोक मनुष्य को अपने भीतर झाँकने, अपने कर्म को समझने और अपने जीवन को अधिक अर्थ पूर्ण बनाने का साहस भरा निमंत्रण देता है ।
यदि इस काव्य-कृति के माध्यम से किसी एक व्यक्ति को भी कठिन समय में आशा मिले, किसी एक मन को भी शांति मिले, किसी एक युवा को भी अपने कर्तव्य का बोध हो, या किसी एक पाठक को भी आत्मचिंतन की प्रेरणा मिले-तो मैं अपने इस प्रयास को सफल मानूँगी ।
अंत में, मैं उसी परम चेतना के श्रीचरणों में अपनी कृतज्ञता अर्पित करती हूँ, जिसने मनुष्य को प्रश्न करने की बुद्धि, सत्य को खोजने की जिज्ञासा और जीवन को सार्थक बनाने की क्षमता प्रदान की है ।
।। सर्वं श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।।
-कमलेश तिवाना-

About the Author

कमलेश तिवाना एक संवेदनशील और रचनात्मक कवियित्रि है। जीवन के तमाम उतार-चढाव और विषम परिस्थियों में खुद को मजबूती से खड़ा करने में, श्रीमद्भगवद्गीता के पठन से, आत्म्वल का अनुभव महसूस किया है, और श्रीमद्भगवद्गीता को एक पथ प्रदर्शिका के रूप में ह्रदय में धारण किया है ।
इसी अनुभूति को, दिन-प्रतिदिन काव्य रूप में श्रीमद्भगवद्गीता को बुनना आरम्भ किया था, जिसे शब्दों, पंक्तियों, काव्यों और फिर महाकाव्य रूप में प्रस्तुत करने के प्रेरणा ईश्वरीय आशीर्वाद सा प्रतीत होती है। “महाकाव्य संस्करण श्रीमद्भगवद्गीता” (दिव्य संवाद-जीवन का) यह काव्य-कृति मेरे लिए केवल लेखन का कार्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा है। इस यात्रा में मैंने अनुभव किया है, कि श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक शब्द और श्लोक मनुष्य को अपने भीतर झाँकने, अपने कर्म को समझने और अपने जीवन को अधिक अर्थ पूर्ण बनाने का साहस भरा निमंत्रण देता है।

Book Details

Publisher: Pothi.com
Number of Pages: 178
Dimensions: 8"x11"
Interior Pages: Full Color
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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