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सत्य पिनाक

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की अमर सत्यगाथा
कृष्ण कुमार मिश्र ' गुरुजी '
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹351 + shipping
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Description

सत्य-पिनाक
(सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की अमर सत्यगाथा)
"जब सत्य की रक्षा हेतु राजसिंहासन, परिवार और स्वयं का अस्तित्व भी दांव पर लग गया, तब जन्मी युग-युगांतर को दिशा देने वाली एक अमर गाथा!"
कृति का परिचय:
'सत्य-पिनाक' केवल एक पौराणिक आख्यान नहीं, अपितु धर्म, त्याग और अडिग संकल्प की वह पावन धारा है जो मानव चेतना को कर्तव्यनिष्ठा के सर्वोच्च शिखर से परिचित कराती है। चक्रवर्ती सम्राट राजा हरिश्चंद्र ने सत्य की कसौटी पर खरे उतरने के लिए जिस असीम धैर्य, कष्ट और वैराग्य को स्वीकार किया, वह संपूर्ण मानव जाति के लिए एक अद्वितीय आदर्श है।
इस काव्य-ग्रंथ की विशिष्टता:
हिंदी साहित्य में पहली बार, त्याग और मर्यादा के इस पावन इतिहास को अत्यंत गेय, मधुर और ओजस्वी सवैया छंद में निबद्ध किया गया है। इसका प्रत्येक छंद पाठक के अंतःकरण में सत्य, शुचिता और सांस्कृतिक गौरव की नई ज्योति प्रज्वलित करता है।
पाठकों के लिए मुख्य आकर्षण:
शास्त्रीय छंद-सौंदर्य: पारंपरिक सवैया छंद के अनुपम प्रवाह और नाद-सौंदर्य में रचित अद्वितीय काव्य-रचना।
धर्म और सत्य की पराकाष्ठा: सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, महारानी तारामती और बालक रोहिताश्व के अगाध त्याग का अत्यंत मार्मिक एवं सजीव चित्रण।
नैतिक चेतना का संचार: आज के युग में भी चारित्रिक दृढ़ता, सदाचार और कर्तव्य-बोध की अमूल्य प्रेरणा देने वाला ग्रंथ।
संग्रहणीय साहित्यिक निधि: सनातन संस्कृति, शास्त्रीय छंदों और गंभीर साहित्य के अनुरागियों के लिए एक अनिवार्य एवं अमूल्य कृति।
सत्य केवल एक शब्द नहीं, जीवन की सर्वोच्च साधना है—इस युगीन साधना के साक्षी बनिए 'सत्य-पिनाक' के संग।

About the Author

कृष्ण कुमार मिश्र 'गुरुजी' हिंदी साहित्य जगत के एक निष्ठावान रचनाकार, गंभीर अध्येता और संस्कृतनिष्ठ काव्य-साधक हैं। आपकी शिक्षा-दीक्षा में अंग्रेजी और शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर (एम. ए. अंग्रेजी, एम. ए. शिक्षा शास्त्र) के साथ-साथ बी. एड. की व्यावसायिक उपाधि सम्मिलित है।
आप अपने लेखन में प्राचीन भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और शास्त्रीय छंदों के संरक्षण के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। छंदों जैसे सवैया, मतगयन्द सवैया, दोहा और चौपाई पर आपका विशेष अधिकार है। साहित्यिक संसार में आप अपने पेन-नेम 'गुरुजी' के नाम से सुविख्यात हैं।
वर्तमान में आप उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हुए अध्यापन कार्य से जुड़े हैं और साथ ही अपनी ओजस्वी व पारंपरिक लेखनी के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में निरंतर रत हैं।

Book Details

ISBN: 9789334468816
Publisher: Krishneel Publishing House
Number of Pages: 111
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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