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“नाम में क्या रखा है” कृष्ण गोपाल विद्यार्थी द्वारा रचित कहानियों का ऐसा संग्रह है, जिसमें हमारे आसपास के जीवन, रिश्तों, सामाजिक व्यवहार और मानवीय स्वभाव को सहज, रोचक और व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।
एक कवि और पत्रकार के रूप में लेखक के अनुभव इन कहानियों में स्पष्ट दिखाई देते हैं। कहीं हास्य पाठक को मुस्कुराता है, कहीं व्यंग्य सामाजिक विसंगतियों पर सोचने को मजबूर करता है और कहीं संवेदनाएँ जीवन की उन सच्चाइयों से रूबरू कराती हैं जिन्हें हम रोज़ देखते हुए भी अनदेखा कर देते हैं।
पुस्तक में 47 कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें नाम में क्या रखा है, नींव की ईंट, थोड़ी सी बेवफाई, घरेलू अर्थशास्त्र, कोशिश की कीमत, मुखौटे की कीमत, उदासी खा गई, समोसे पर संवाद, पंद्रह लाख, सम्मान के सौदागर, रिश्तों की राजनीति, खून के रिश्ते, झुर्रियों में लिपटा इश्क और दो किनारे जैसी रचनाएँ शामिल हैं।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो सरल भाषा में लिखी सामाजिक, हास्य-व्यंग्य और संवेदनात्मक कहानियों के माध्यम से जीवन और समाज को एक अलग नज़रिए से देखना चाहते हैं।
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