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नये दौर के नये भिखारी

व्यंग्य संग्रह
कृष्ण गोपाल विद्यार्थी
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Drama/Play
Language: Hindi
Price: ₹299 + shipping
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Description

आज के बदलते दौर में जब सामाजिक जीवन, राजनीति, डिजिटल संस्कृति और रोजमर्रा की परेशानियाँ अपने-आप में किसी व्यंग्य से कम नहीं रह गई हैं, तब “नये दौर के नये भिखारी” एक ऐसा व्यंग्य संग्रह है जो पाठक को हँसाते-हँसाते सोचने पर मजबूर करता है।

कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने इस संग्रह में हमारे आसपास की अनेक छोटी-बड़ी विसंगतियों, सामाजिक प्रवृत्तियों और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं को बेहद सहज, रोचक और चुटीली भाषा में प्रस्तुत किया है। संग्रह में लोकतंत्र और राजनीति से लेकर सोशल मीडिया, शिक्षा, स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन, साहित्य, दिखावटी सम्मान, बदलती जीवनशैली और उपभोक्तावादी सोच तक अनेक विषयों पर तीखा लेकिन मनोरंजक व्यंग्य देखने को मिलता है।

कहीं चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हास्यपूर्ण कटाक्ष है, कहीं अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों की व्यावसायिक मानसिकता पर चोट, तो कहीं सोशल मीडिया की बनावटी दुनिया और डिजिटल जीवन की विडंबनाओं पर मजेदार टिप्पणी। पुस्तक में स्वास्थ्य व्यवस्था, मिलावट, रक्तदान, घरेलू रिश्तों, मंचीय कविता, सम्मान संस्कृति और बदलते सामाजिक मूल्यों जैसे विषय भी अपने अलग अंदाज में सामने आते हैं।

इस संग्रह की खासियत यह है कि लेखक केवल हँसी पैदा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हास्य के पीछे छिपे सामाजिक प्रश्नों को भी सामने लाते हैं। व्यंग्य के माध्यम से पाठक को अपने आसपास की परिस्थितियों को एक अलग नजर से देखने का अवसर मिलता है।

“नये दौर के नये भिखारी” उन पाठकों के लिए एक दिलचस्प पुस्तक है जिन्हें हिंदी हास्य-व्यंग्य, सामाजिक सरोकारों और समकालीन जीवन पर हल्के-फुल्के लेकिन धारदार लेखन में रुचि है।

पढ़िए, मुस्कुराइए और फिर थोड़ा रुककर सोचिए—
क्या सचमुच हम बदल गए हैं, या सिर्फ हमारी भिखारी बनने की वजहें बदल गई हैं?

About the Author

कृष्ण गोपाल विद्यार्थी एक स्थापित कवि, पत्रकार और लेखक हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकारों, समकालीन जीवन की विसंगतियों और मानवीय व्यवहार को देखने की पैनी दृष्टि दिखाई देती है।

अपने व्यंग्य लेखन में वे गंभीर सामाजिक विषयों को हास्य, विडंबना और सरल भाषा के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। उनके लेखन की विशेषता यह है कि पाठक पहले मुस्कुराता है और फिर उसी मुस्कान के पीछे छिपे सवालों पर विचार करने लगता है। पुस्तक की भूमिका में भी उन्हें प्रख्यात कवि, पत्रकार एवं लेखक के रूप में उल्लेखित किया गया है।

Book Details

ISBN: 9788168963733
Publisher: Sjain Publication
Number of Pages: 125
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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