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"तीन शादी, तीन तलाक फिर भी दुल्हन कुंवारी" एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक हिंदी उपन्यास है जो आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं, विश्वास और धोखे के बीच संघर्ष, तथा जीवन के अप्रत्याशित मोड़ों को दर्शाता है।
कहानी राजन और रवीना के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ विवाह के सपने, पारिवारिक अपेक्षाएँ, सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत निर्णय एक-दूसरे से टकराते हैं। रिश्तों में पैदा होने वाली गलतफहमियाँ, अधूरे वादे और टूटते विश्वास किस प्रकार जीवन की दिशा बदल देते हैं, यह उपन्यास उसी सच्चाई को उजागर करता है।
यह पुस्तक केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं, सामाजिक वास्तविकताओं और भाग्य के रहस्यमय खेल का दर्पण है। यदि आपको रिश्तों, सामाजिक विषयों और जीवन के यथार्थ पर आधारित कहानियाँ पसंद हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक रोचक और प्रेरक अनुभव साबित होगी।
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