You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
सात मुखौटे चोरी हो जाने के बाद एक मनुष्य पहली बार अपने नंगे चेहरे पर
सूरज की धूप पाता है — और लोग उसे "पागल" कहने लगते हैं।
1918 में प्रकाशित "पागल" ख़लील जिब्रान की अंग्रेज़ी में पहली पुस्तक है:
पैंतीस छोटी रचनाएँ — दृष्टांत और गद्य-कविताएँ, जो धर्म के पाखंड, न्याय
की विडंबना और मनुष्य के भीतरी अकेलेपन को तीखे व्यंग्य और गहरी करुणा
से देखती हैं। "द प्रॉफ़ेट" के लेखक की यह कृति उनकी आगे की सारी रचनाओं
की कुंजी है।
इस द्विभाषी संस्करण में मूल 1918 का अंग्रेज़ी पाठ बाएँ पृष्ठ पर और उसका
नया हिन्दी अनुवाद ठीक सामने के दाएँ पृष्ठ पर है, ताकि पाठक अर्थ के साथ
मूल की लय और संबोधन भी मिला सके। साथ में जिब्रान के अपने तीन चित्र,
विस्तृत भूमिका, अनुवादक की टिप्पणी और शब्द-टिप्पणियाँ।
अनुवाद: कृष्ण चन्द पाण्डेय · प्रकाशक: आनंद प्रकाशन
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book पागल.