You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
"4 रातें जागी। भूख भी लगनी बंद हो गई थी।"
कुछ रिश्ते होते हुए भी नहीं होते। साँस लेते हैं, पर ज़िंदा नहीं होते। घर की दीवारों पर टंगी तस्वीरों की तरह — जिन पर हमेशा धूल की परत जमी रहती है।
'धुंधले रिश्ते' किरन की कहानी है। 18 की उम्र में ब्याह दी गई एक लड़की जो 55 साल तक अपने बिखरे घर को समेटती रही। पति का तिरस्कार, बच्चों की नफरत, बहू का सितम — फिर भी वो टूटी नहीं।
ये कहानी हर उस औरत की है जो रिश्तों को धुंधला होने से बचाने की लड़ाई लड़ रही है।
एक माँ का वचन। एक बेटी की उम्मीद। क्या किरन अपना वचन निभा पाएगी?
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book धुंधले रिश्ते — भाग 1.