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विषयसूची
प्रथम खण्ड — बीसम शताब्दीक दार्शनिक मोड़ 9
अध्याय 1 — दर्शनक दोसर मोड़: चेतनासँ भाषा धरि 10
अध्याय 2 — बीसम शताब्दीमे दर्शन किएक बदलल? 17
अध्याय 3 — विश्लेषणात्मक आ महाद्वीपीय दर्शनक विभाजन 26
अध्याय 4 — भारतीय दर्शन एहि नक्शामे कतय? 31
अध्याय 5 — मिथिलाक समानान्तर प्रवेश-बिन्दु 36
अध्याय 6 — तुलनात्मक दर्शनक खतरा 41
द्वितीय खण्ड — विश्लेषणात्मक दर्शन आ तर्कक नूतन संसार 46
अध्याय 7 — फ्रेगे: तर्क, अर्थ आ सन्दर्भ 47
अध्याय 8 — रसेल: वर्णन, तार्किक रूप आ जगत 52
अध्याय 9 — मूर आ सामान्य बुद्धि 57
अध्याय 10 — आरम्भिक विट्गेन्स्टाइन 61
अध्याय 11 — तार्किक प्रत्यक्षवाद 66
अध्याय 12 — कार्नाप आ तत्त्वमीमांसाक प्रश्न 70
अध्याय 13 — क्वाइन: विश्लेषणात्मक–संश्लेषणात्मक भेदक संकट 75
अध्याय 14 — विश्लेषणात्मक दर्शन आ नव्य-न्याय 80
तृतीय खण्ड — भाषिक मोड़ आ अर्थक दर्शन 85
अध्याय 15 — उत्तरकालीन विट्गेन्स्टाइन: अर्थ प्रयोगमे 86
अध्याय 16 — ऑस्टिन: कहब सेहो करब अछि 91
अध्याय 17 — सर्ल आ भाषिक क्रिया 96
अध्याय 18 — भाषा निजी भऽ सकैत अछि की? 101
अध्याय 19 — शब्दक अर्थ: वस्तु, प्रयोग कि सम्बन्ध? 106
अध्याय 20 — भारतीय शब्दमीमांसा 111
अध्याय 21 — मिथिलाक भाषिक विश्लेषण 116
चतुर्थ खण्ड — संरचनावाद 121
अध्याय 22 — संरचना की अछि? 122
अध्याय 23 — सस्यूर: संकेतक आ संकेतित 127
अध्याय 24 — लेवी-स्ट्रॉस: मिथक आ संरचना 132
अध्याय 25 — संरचना आ व्यक्ति 137
अध्याय 26 — भारतीय भाषिक परम्परा आ संरचना 142
अध्याय 27 — संरचनावादक सीमा 148
पंचम खण्ड — उत्तर-संरचनावाद आ विखण्डन 153
अध्याय 28 — संरचनासँ उत्तर-संरचना धरि 154
अध्याय 29 — देरिदा: उपस्थितिक तत्त्वमीमांसाक आलोचना 159
अध्याय 30 — अर्थ-भिन्नताक स्थगित प्रक्रिया: अर्थक स्थगन आ भिन्नता 164
अध्याय 31 — लेखन, वाणी आ केन्द्रक प्रश्न 169
अध्याय 32 — विखण्डन की अछि—आ की नहि अछि? 174
अध्याय 33 — भारतीय दर्शन आ विखण्डन 179
अध्याय 34 — नव्य-न्याय विखण्डनक प्रतिपक्ष? 184
अध्याय 35 — समानान्तर उत्तरपक्ष 189
षष्ठ खण्ड — फूको, ज्ञान आ सत्ता 195
अध्याय 36 — ज्ञान आ सत्ता अलग अछि की? 196
अध्याय 37 — फूकोक पुरातत्त्व 202
अध्याय 38 — वंशावली: इतिहास लिखबाक दोसर ढंग 207
अध्याय 39 — अनुशासन, निगरानी आ सामान्यीकरण 213
अध्याय 40 — शरीर, संस्था आ ज्ञान 218
अध्याय 41 — फूको आ समानान्तर इतिहास-दृष्टि 223
सप्तम खण्ड — उत्तर-आधुनिकता 229
अध्याय 42 — उत्तर-आधुनिकता की अछि? 230
अध्याय 43 — ल्योटार आ महाख्यानपर अविश्वास 236
अध्याय 44 — बौद्रियार: प्रतिरूप, माध्यम आ अधि-यथार्थता (hyperreality) 242
अध्याय 45 — सत्यक अन्त भेल की? 247
अध्याय 46 — विज्ञान, इतिहास आ उत्तर-आधुनिक आलोचना 252
अध्याय 47 — समानान्तर दर्शनक उत्तर 258
अष्टम खण्ड — व्याख्या, पाठ आ पाठक 264
अध्याय 48 — हर्मेन्यूटिक्स: बुझब स्वयं समस्या किएक? 265
अध्याय 49 — गाडामर: परम्परा आ पूर्वबोध 271
अध्याय 50 — रिकोयर: पाठ, प्रतीक आ व्याख्या 275
अध्याय 51 — लेखकक अभिप्राय बनाम पाठकक अर्थ 279
अध्याय 52 — भारतीय भाष्य-परम्परा 287
अध्याय 53 — मिथिलाक शास्त्रार्थ एकटा व्याख्यात्मक अभ्यास (hermeneutic practice) केर रूपमे? 291
नवम खण्ड — आलोचनात्मक सिद्धान्त, मार्क्सक बाद 295
अध्याय 54 — फ्रैंकफर्ट स्कूल 296
अध्याय 55 — होर्खाइमर आ अडोर्नो: आधुनिक विवेकक आत्मालोचना 302
अध्याय 56 — मार्क्यूजे: उपभोक्ता समाज आ एक-आयामी मनुष्य 308
अध्याय 57 — हाबर्मास: संवादात्मक विवेक 315
अध्याय 58 — सार्वजनिक क्षेत्र आ लोकतन्त्र 323
अध्याय 59 — शास्त्रार्थ, वाद आ संवादात्मक विवेक 333
दशम खण्ड — स्त्रीवाद, लिंग आ देह 343
अध्याय 60 — स्त्रीवादी दर्शनक अनेक स्वर 344
अध्याय 61 — सिमोन द बोउवार: स्त्री बनाओल जाइत अछि 354
अध्याय 62 — देह, अनुभव आ सत्ता 364
अध्याय 63 — जूडिथ बटलर: लिंग (gender), प्रदर्शनात्मकता (performativity) आ पहचान 375
अध्याय 64 — अन्तर्संबद्ध असमानता (intersectionality): जाति, वर्ग, लिंग, धर्म आ क्षेत्र 384
अध्याय 65 — भारतीय स्त्रीवादी दर्शनक प्रश्न 396
अध्याय 66 — मिथिलाक समानान्तर स्त्री-दृष्टि 407
एकादश खण्ड — औपनिवेशिकता, उत्तर-औपनिवेशिकता आ ज्ञान 413
अध्याय 67 — औपनिवेशिक ज्ञान की करैत अछि? 414
अध्याय 68 — एडवर्ड सईद: प्राच्यवाद (Orientalism) 423
अध्याय 69 — गायत्री स्पिवाक: अधीनस्थ बोलि सकैत अछि? 433
अध्याय 70 — होमी भाभा: संकरता आ औपनिवेशिक अन्तराल 442
अध्याय 71 — अधीनस्थ अध्ययन (Subaltern Studies) आ इतिहासक हाशिया 451
अध्याय 72 — उत्तर-औपनिवेशिकतासँ औपनिवेशिकता-मुक्त (decolonial) विचार धरि 460
अध्याय 73 — भारतीय दर्शनक औपनिवेशिक वर्गीकरण 469
अध्याय 74 — मिथिला: साम्राज्य, राष्ट्र आ क्षेत्रक बीच 480
द्वादश खण्ड — मन, चेतना आ व्यक्तित्व 490
अध्याय 75 — मन-दर्शन (Philosophy of Mind) केर नूतन प्रश्न 491
अध्याय 76 — मन–देह समस्या 500
अध्याय 77 — व्यवहारवाद, तादात्म्य सिद्धान्त (identity theory) आ कार्यात्मकतावाद (functionalism) 510
अध्याय 78 — चेतनाक कठिन समस्या 521
अध्याय 79 — उद्देश्यता (intentionality) आ आत्मबोध (self) 531
अध्याय 80 — भारतीय आत्मा–अनात्मा–चित्त विवाद 540
अध्याय 81 — न्याय, बौद्ध आ आधुनिक मन-दर्शन (philosophy of mind) केर त्रिकोणीय संवाद 550
त्रयोदश खण्ड — विज्ञान, तकनीक, डिजिटल जगत आ कृत्रिम बुद्धि 562
अध्याय 82 — वैज्ञानिक यथार्थवादक नूतन विवाद 563
अध्याय 83 — प्राकृतिक विज्ञान आ सामाजिक विज्ञान 574
अध्याय 84 — तकनीक केवल औजार नहि 585
अध्याय 85 — डिजिटल जगतमे सत्य 597
अध्याय 86 — एल्गोरिदम, वर्गीकरण आ सत्ता 609
अध्याय 87 — कृत्रिम बुद्धि: बुद्धि की अछि? 623
अध्याय 88 — मशीन चेतना: प्रश्न खुलल अछि 635
अध्याय 89 — कृत्रिम बुद्धि (AI) युगमे प्रमाण आ उत्तरदायित्व 648
चतुर्दश खण्ड — एकैसम शताब्दीक समानान्तर दर्शन 660
अध्याय 90 — बहुप्रमाणीय विवेकवादक दोसर रूप 661
अध्याय 91 — सहअस्तित्वात्मक यथार्थवाद आ भाषिक मोड़ 674
अध्याय 92 — गरिमा-आधारित नैतिकता आ नूतन पहचान 688
अध्याय 93 — बहुकेन्द्रिक लोकतन्त्र आ नेटवर्क-सत्ता 705
अध्याय 94 — धर्मक विवेकपूर्ण बहुलता आ उत्तर-धर्मनिरपेक्ष समाज 722
अध्याय 95 — समानान्तर इतिहास-दृष्टि: वंशावली-पद्धति (genealogy), अभिलेखागार (archive) आ प्रमाण 739
अध्याय 96 — आत्मसमीक्षा: समानान्तर दर्शन स्वयं अपन विखण्डन कोना स्वीकारत? 759
उपसंहारिक खण्ड — नूतन सूत्र 773
अध्याय 97 — संरचना अछि, मुदा संरचना नियति नहि 774
अध्याय 98 — भाषा सीमा अछि, मुदा कारागार नहि 786
अध्याय 99 — सत्ता ज्ञानकेँ प्रभावित करैत अछि, सत्यकेँ मनमाना नहि बनबैत अछि 798
अध्याय 100 — गजेन्द्र ठाकुरक समानान्तर दर्शन: खण्ड–१ आ खण्ड–२ केर समेकित प्रतिपादन 810
दार्शनिक आ बौद्धिक कालक्रम 822
पारिभाषिक शब्दावली 823
ऐतिहासिक स्थान-नाम सामञ्जस्य-सूची 825
भाषा-नाम सामञ्जस्य-सूची 826
समेकित ग्रन्थसूची 827
नाम-विषय अनुक्रमणिका 855
चित्र-सूची
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