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भारत विश्व सभ्यताओं से पूर्व ज्ञान-विज्ञान की मातृभूमि

डॉ. आकाश चंदा
Type: Print Book
Genre: Social Science, History
Language: Hindi
Price: ₹225 + shipping
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Description

भारत विश्व सभ्यताओं से पूर्व — ज्ञान-विज्ञान की मातृभूमि

लेखक: डॉ. आकाश चंदा | संपादक: श्रीमती चंदा आकाश

क्या भारत केवल एक देश है — या यह समस्त मानव-सभ्यता की ज्ञान-जननी है?
जब यूरोप और अमेरिका हिमयुगों से जूझ रहे थे, जब विश्व की अन्य सभ्यताएँ अपने शैशव में थीं — तब भारतभूमि पर वेद रचे जा रहे थे, गणित के सूत्र गढ़े जा रहे थे, खगोल के रहस्य उद्घाटित हो रहे थे। यह कृति उसी गौरवशाली सत्य का प्रामाणिक शोध-विवेचन है।
इस ग्रंथ में आप जानेंगे:
विश्व का प्रथम बहुविषयक विश्वविद्यालय — शारदा पीठ (लगभग 5502 ईसा पूर्व) कहाँ था और उसमें क्या पढ़ाया जाता था। ऋषि लगध द्वारा रचित विश्व के प्रथम खगोल-गणित ग्रंथ 'वेदांग ज्योतिष' का महत्त्व क्या है। अठारह महान ऋषियों ने भौतिक विज्ञान के किन मूलभूत सिद्धांतों की खोज की। भारतीय अंक-प्रणाली से प्रभावित होकर अल-बेरूनी ने क्या लिखा। चीन, जापान और कोरिया भारत को 'देवभूमि' क्यों कहते थे। वाराहमिहिर ने किस प्रकार लुप्त प्राच्य विज्ञान का पुनर्जागरण किया। 'यत् पिंडे तद् ब्रह्माण्डे' — विज्ञान और अध्यात्म का वह अद्भुत संगम जो केवल भारत में था।

विशेष:

इस कृति को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का हार्दिक संदेश एवं माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर की कुलपति प्रो. विमला वाई. का प्राक्कथन प्राप्त है।

पाठक वर्ग: शोधार्थी, इतिहास-प्रेमी, विद्यार्थी, दर्शन एवं विज्ञान में रुचि रखने वाले जिज्ञासु पाठक तथा प्रत्येक भारतीय जो अपनी जड़ों को जानना चाहता है।
प्रकाशक: सह-अरण्य प्राच्य शोध केन्द्र, सहारनपुर

ISBN: 978-81-685335-5-4

पृष्ठ: 72 | प्रथम संस्करण: 21 अप्रैल 2026

"भारत की सभ्यता ने शैशव से नहीं, प्रौढ़ता से यात्रा आरंभ की।"

— डॉ. आकाश चंदा

About the Author

डॉ. आकाश चंदा

प्राचीन भारतीय ज्ञान–विज्ञान के अध्ययन, शोध एवं संवर्धन हेतु समर्पित इंडोलॉजिस्ट

डॉ. आकाश चंदा एक समर्पित इंडोलॉजिस्ट एवं शोधकर्ता हैं, जिन्होंने अपना जीवन इस एक मूल प्रश्न को उत्तर देने में अर्पित किया है — क्या भारत विश्व की समस्त सभ्यताओं से पूर्व ज्ञान-विज्ञान की मातृभूमि था?
सहारनपुर की उस पावन सह-अरण्य भूमि पर — जहाँ वैदिक काल से ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है — उन्होंने सह-अरण्य प्राच्य शोध केन्द्र की स्थापना 31 जुलाई 2022 को अपने आचार्य डॉ. केदारनाथ प्रभाकर की स्मृति एवं प्रेरणा में की। यह केन्द्र भारतीय प्राच्य ज्ञान-विज्ञान, वैदिक परंपरा, दर्शन एवं शास्त्रीय विरासत के अनुसंधान, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर क्रियाशील है।
शैक्षणिक एवं शोध परंपरा:
उन्होंने 2008 में स्वामी रामतीर्थ (1873–1906) — आधुनिक भारत के महान तत्त्वदर्शी एवं आत्मज्ञानी ऋषि — की वेदांतिक अंग्रेज़ी कविताओं पर केंद्रित शोध पर डॉक्टरेट (पी.एच.डी.) की उपाधि प्राप्त की। वे प्रख्यात इंडोलॉजिस्ट, इतिहासकार एवं 'कालविज्ञान' तथा 'वेदचक्षु' पत्रिकाओं के संपादक डॉ. केदारनाथ प्रभाकर, डी.लिट्. (1933–2022) की आचार्य परंपरा के वाहक हैं। बौद्धिक दृष्टि से वे सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं दार्शनिक-कवि रामलाल 'शाद सरहदी' (1914–1998) के दौहित्र हैं तथा उनकी शोध परंपरा प्रो. डॉ. ममता सिंघल, जे. वी. जैन डिग्री कॉलेज, सहारनपुर से प्रेरित है।
शोध-दृष्टि:
एक इंडोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. चंदा की विशेषता यह है कि वे भारतीय ज्ञान-परंपरा को केवल आस्था की दृष्टि से नहीं, अपितु वेद, उपनिषद्, पुराण, खगोल-शास्त्र, गणित एवं ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। शारदा पीठ से लेकर वाराहमिहिर तक, ऋषि लगध से लेकर अल-बेरूनी तक — उनका शोध भारत की वैज्ञानिक परंपरा की उस अखण्ड धारा को उद्घाटित करता है जो विश्व की समस्त सभ्यताओं से पूर्व प्रवाहित थी।
प्रमुख कृतियाँ:
द सेलेस्टियल ब्लिस (2005), रामा इन द आईज़ ऑफ इक़बाल (2010), मस्क्युलर वेदांत (2011), द कैंडल्स ऑफ़ प्रशान्ति निलयम् (2011), वहदतनामा (2013), लव क्रेविंग्स (2018) तथा इल्यूज़न एंड इट्स रियलिटी (2022) — इन सभी कृतियों में वेदांत, भारतीय दर्शन एवं प्राच्य विज्ञान का गहन विवेचन है।
प्रस्तुत ग्रंथ 'भारत विश्व सभ्यताओं से पूर्व — ज्ञान-विज्ञान की मातृभूमि' उनकी इंडोलॉजिकल शोध-यात्रा की वह महत्त्वपूर्ण कड़ी है जो प्रत्येक भारतीय में आत्मगौरव जागृत करने एवं भारतीय ज्ञान-विज्ञान की वैश्विक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने हेतु समर्पित है।

"सत्यं परं धीमहि"

सह-अरण्य प्राच्य शोध केन्द्र, सहारनपुर

Book Details

ISBN: 9788168533554
Publisher: SehAranya Oriental Research Centre
Number of Pages: 72
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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