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"कल्पनाएँ उभरने लगी" डॉ. गौरी अरोड़ा का प्रथम जननिका-संग्रह है, जिसमें 650 से अधिक जननिकाएँ संकलित हैं। यह संग्रह जीवन के विविध रंगों—प्रेम, प्रकृति, परिवार, समाज, नारी सम्मान, मानवीय संवेदनाएँ, संघर्ष, आशा और आध्यात्मिक चिंतन—को अत्यंत संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करता है।
जननिका हिंदी साहित्य की एक नव्यतम पद्यात्मक विधा है, जिसमें मात्र छह शब्दों के माध्यम से गहन भावों और विचारों को व्यक्त किया जाता है। इस पुस्तक की प्रत्येक रचना पाठकों को सोचने, महसूस करने और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।
यदि आप लघु काव्य, सूक्ष्म अभिव्यक्ति और अर्थपूर्ण साहित्य के प्रेमी हैं, तो यह संग्रह आपके लिए एक उत्कृष्ट कृति सिद्ध होगा।
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