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"रस-निष्पत्ति संबंधी विविध मत" भारतीय काव्यशास्त्र के महत्वपूर्ण विषय रस-सिद्धान्त पर आधारित एक शोधपरक एवं उपयोगी पुस्तक है। इस पुस्तक में रस की निष्पत्ति, साधारणीकरण तथा रीति-सिद्धान्त का सरल एवं व्यवस्थित अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक में आचार्य भरतमुनि, भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्टनायक तथा अभिनवगुप्त जैसे प्रमुख आचार्यों के रस-सिद्धान्त संबंधी मतों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। हिन्दी साहित्य, संस्कृत साहित्य, काव्यशास्त्र तथा साहित्यिक आलोचना के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए यह पुस्तक एक उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ है।
Key Features
✅ रस-सिद्धान्त का विस्तृत अध्ययन
✅ रस-निष्पत्ति संबंधी प्रमुख मतों का विश्लेषण
✅ साधारणीकरण की अवधारणा का सरल विवेचन
✅ रीति-सिद्धान्त का इतिहास एवं स्वरूप
✅ विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं अध्यापकों के लिए उपयोगी
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