You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
अनवरत स्क्रॉलिंग, वायरल ट्रेंड्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सिफारिशों से संचालित इस डिजिटल युग में यह पहचानना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है कि सत्य क्या है और किस पर विश्वास किया जाए। ऐसे समय में ‘डिजिटल धर्म’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि विवेक, स्पष्टता और आत्मबोध की ओर ले जाने वाली एक सार्थक यात्रा है।
वेद, उपनिषद, भगवद्गीता तथा अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों के कालजयी ज्ञान पर आधारित यह पुस्तक आधुनिक जीवन की जटिल डिजिटल चुनौतियों को समझने के लिए एक अद्वितीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह पाठकों को स्पष्ट चिंतन, तर्कपूर्ण निर्णय-क्षमता और संतुलित जीवन-दृष्टि विकसित करने की प्रेरणा देती है।
प्रत्येक अध्याय में भारतीय दर्शन के गहन सिद्धांतों के साथ ऐसे व्यावहारिक अभ्यास दिए गए हैं, जो दैनिक जीवन में सहजता से अपनाए जा सकते हैं—जैसे फर्जी समाचारों और भ्रामक सूचनाओं की पहचान करना, मानसिक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठना, क्षणिक आकर्षणों के स्थान पर विवेकपूर्ण निर्णय लेना तथा सृजनात्मकता और समालोचनात्मक चिंतन को अपनी वास्तविक शक्ति बनाना।
विद्यार्थियों, युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों तथा डिजिटल युग में मानसिक स्पष्टता और संतुलन की खोज करने वाले प्रत्येक पाठक के लिए यह पुस्तक आत्मचिंतन, विवेकपूर्ण जीवन और जागरूक कर्म का प्रेरणास्रोत है।
सूचनाओं के शोर से ऊपर उठिए।
विवेक की कला को आत्मसात कीजिए।
और अपने भीतर निहित उस कालातीत प्रज्ञा की खोज कीजिए, जो हर युग में मनुष्य का सच्चा मार्गदर्शन करती आई है।
स्क्रीन से स्वत्व तक (From Screen to Self)
अतिसंयुक्त (Hyperconnected) मन के लिए प्राचीन ज्ञान का आधुनिक मार्ग।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book डिजिटल धर्म - क्लिक से चिंतन तक की वैदिक यात्रा.