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योग सूत्र आसनों की पुस्तक नहीं है।
पूरे 196 सूत्रों में आसन पर सिर्फ़ तीन सूत्र हैं — और उनमें किसी मुद्रा का नाम तक नहीं आता। यह किसी धर्म की पुस्तक भी नहीं है। यह मन का एक तकनीकी मैनुअल है, प्रयोग की भाषा में लिखा हुआ — यह करो, यह होगा।
पूरा ग्रंथ एक शब्द से शुरू होता है — "अथ", यानी अब। और भाष्यकार इस एक शब्द पर इसलिए रुके हैं क्योंकि इसका अर्थ सिर्फ़ आरम्भ नहीं है। इसका अर्थ है — अब, जब आप तैयार हैं।
यह भाष्य एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा है जिसका जीवन दो कमरों के बीच बँटा है — ऑपरेशन थिएटर, जहाँ हर चीज़ नापी जाती है, और वह कमरा जहाँ वे लोगों को साँस और ध्यान सिखाते हैं। लिखी है डॉ. मोहित शर्मा ने — M.S., M.Ch. (CTVS), एसोसिएट प्रोफेसर, हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग, SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर; और वर्ष 2018 से आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक।
हर सूत्र यहाँ इस तरह आता है:
• मूल संस्कृत सूत्र
• पदच्छेद और शब्दार्थ
• सरल भावार्थ — एक वाक्य में
• विस्तृत व्याख्या, बिना पारिभाषिक भारीपन के
• "रोज़ के जीवन में" — घर, काम, नींद और रिश्तों के साधारण उदाहरणों के साथ
पुस्तक में क्या मिलेगा:
• चारों पाद पूरे — समाधि, साधन, विभूति और कैवल्य, एक ही खंड में
• चित्त की पाँच वृत्तियाँ, और पाँच क्लेश — दुख की पूरी सूची
• नौ बाधाएँ, और हर एक का अलग इलाज — किसी भी लम्बे प्रयास पर लागू
• अष्टांग योग — यम से समाधि तक, आठों अंग क्रम से
• आसन की पूरी परिभाषा, जो सिर्फ़ दो शब्द है — स्थिर और बिना कष्ट
• प्राणायाम — और साँस रोकने पर एक हृदय शल्य चिकित्सक की स्पष्ट चेतावनी
• धारणा, ध्यान, समाधि और संयम — तीन नहीं, एक ही चीज़ की तीन गहराइयाँ
• सिद्धियों की पूरी सूची — और पतंजलि का अपना वाक्य कि ये बाधाएँ हैं
• वासना, संस्कार और आदत बदलने का वह सूत्र जो चार खंभे गिनाता है
• विषय-अनुक्रम — कब कौन सा सूत्र: नींद न आने से लेकर तुलना, गुस्से और डर तक, स्थिति के हिसाब से सीधे सूत्र तक पहुँचने की सूची
• अभ्यास की डायरी का पन्ना, और अंत में पूरे ग्रंथ का सार — बीस बातें
जहाँ किसी अभ्यास पर आधुनिक शोध मौजूद है, वह यहाँ अपनी सीमाओं सहित रखा गया है — न बढ़ाकर, न घटाकर। और जो नापने के दायरे से बाहर है, उसे वैसा ही रहने दिया गया है।
"मन एक जगह टिक नहीं रहा" — यह शिकायत दो हज़ार साल पुरानी है। जवाब भी उतना ही पुराना है, और वह इसी पुस्तक में सूत्र दर सूत्र खुलता है।
यह पुस्तक किसी चिकित्सा या मानसिक स्वास्थ्य उपचार का विकल्प नहीं है।
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