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अंगारे और आंचल

डॉ. सुशीला जांगड़ा
Type: Print Book
Genre: Reference, History
Language: Hindi
Price: ₹299 + shipping
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Description

इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और साम्राज्यों की कथा नहीं है। उसके पन्नों में उन अनगिनत नारियों का साहस, त्याग और संकल्प भी दर्ज है, जिन्होंने समाज और राष्ट्र की दिशा बदली।

'अंगारे और आंचल' भारतीय नारी-शक्ति को समर्पित एक विनम्र प्रयास है। इसमें प्राचीन और पौराणिक काल से लेकर मध्यकाल, मराठा और अठारहवीं सदी के संघर्ष, 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम तक की 44 वीरांगनाओं के जीवन को सरल, सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

इसमें कैकेयी, उर्मिला, रानी पद्मिनी, रानी कर्णावती, रानी दुर्गावती, राजमाता जीजाबाई, देवी अहिल्याबाई होल्कर, रानी चेन्नम्मा, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, ऊदा देवी, मैडम भीकाजी कामा, मातंगिनी हाजरा, दुर्गा भाभी, कनकलता बरुआ, रानी गाइदिन्ल्यू, कैप्टन लक्ष्मी सहगल और अरुणा आसफ अली जैसे नामों के साथ महाबीरी देवी, असगरी बेगम और अजीजन बाई जैसी कम चर्चित वीरांगनाएँ भी शामिल हैं।

हर अध्याय में जीवन-परिचय और संघर्ष के साथ एक प्रेरणादायी संदेश भी है। कहीं त्याग और धैर्य, कहीं मातृत्व और संस्कार, कहीं नेतृत्व और प्रशासन, तो कहीं देशभक्ति और बलिदान की सीख मिलती है।

यह पुस्तक विद्यार्थियों, युवाओं और विशेषकर बेटियों के लिए एक प्रेरणा-स्रोत है। यह बताती है कि वीरता का कोई एक रूप नहीं होता और परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, साहस और दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ा जा सकता है।

यह पुस्तक किनके लिए है:

विद्यार्थी, शिक्षक और विद्यालय/गुरुकुल पुस्तकालय
इतिहास और भारतीय संस्कृति के प्रेमी
अपनी बेटियों को प्रेरक कहानियाँ पढ़ाना चाहने वाले अभिभावक
उपहार देने के लिए एक प्रेरणादायक पुस्तक खोजने वाले पाठक

About the Author

डॉ. सुशीला जांगड़ा हरियाणवी लोक संस्कृति, हिंदी साहित्य और काव्य-सृजन के क्षेत्र में सक्रिय एक संवेदनशील और समर्पित साहित्यकार हैं। उनका जन्म 7 जुलाई 1966 को हुआ। उन्होंने महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी (WCDPO) के पद पर रहते हुए महिला और बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने साहित्य और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को अपना मुख्य रचनात्मक माध्यम बनाया।

वे वर्तमान में 'म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान' संगठन में राष्ट्रीय महिला प्रमुख और हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था में संयोजक हैं। इसके अलावा वे संस्कार भारती, सर्व कल्याण मंच सहित कई सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हैं।

उन्हें लगभग 130 ऑनलाइन सम्मान-पत्र मिल चुके हैं और लगभग 80 साहित्यिक एवं सामाजिक मंचों द्वारा वे सम्मानित हो चुकी हैं। इनमें डॉ. लाल चंद गुल्ला स्मृति साहित्य सम्मान, रामप्यारी वर्मा स्मृति साहित्य सम्मान, काव्य सारथी सम्मान, काव्य गौरव सम्मान, हिंदी साहित्य भूषण सम्मान, नारी गौरव सम्मान और श्री राम राष्ट्रीय मातृ आपार् साहित्य सम्मान प्रमुख हैं।

प्रकाशित कृतियाँ: गीत सरिता (2021), लोक झंकार (2021), लोक रश्मियाँ (2024), शब्द रश्मियाँ (2025), प्रकाश बिंदु (2026), रसिक लहरें (2026) और दीपशिखा (2026)। वे हरियाणा दर्शन काव्य ग्रंथ, नारी काव्य संहिता भाग-2, गौरव ग्रंथ और मातृभूमि जैसे अनेक साझा संकलनों में भी शामिल हैं।

उनके लेखन में लोक संस्कृति, सामाजिक सरोकार, नारी चेतना और मानवीय संवेदनाओं का सहज भाषा और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ सुंदर समन्वय दिखता है।

Book Details

ISBN: 9788118027195
Publisher: Sjain Publication
Number of Pages: 129
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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