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समत्व–चेतना
मन, प्राण और जीवन के संतुलन का रहस्य
क्या मानसिक शांति केवल परिस्थितियों पर निर्भर करती है, या वह हमारे भीतर विकसित होने वाली एक चेतना है?
समत्व–चेतना भारतीय दर्शन, योग और आधुनिक मनोविज्ञान की अंतर्दृष्टियों का समन्वित प्रस्तुतीकरण है। यह पुस्तक बताती है कि मन, प्राण और जीवन के बीच संतुलन स्थापित करके हम तनाव, असंतुलन और मानसिक भ्रम से ऊपर उठकर अधिक स्पष्ट, शांत और सार्थक जीवन जी सकते हैं।
सरल भाषा, व्यावहारिक दृष्टिकोण और गहन चिंतन से युक्त यह पुस्तक आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, मानसिक स्पष्टता और जीवन-दृष्टि के विकास की दिशा में आपका मार्गदर्शन करती है।
यह पुस्तक किसी चमत्कारी समाधान या चिकित्सकीय उपचार का दावा नहीं करती, बल्कि ऐसे सिद्धांत और अभ्यास प्रस्तुत करती है जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाकर व्यक्ति अधिक संतुलित, सजग और उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हो सकता है।
यदि आप अपने भीतर स्थिरता, शांति और संतुलन की खोज में हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।
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