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वस्त्र बोलते हैं (जनिका संग्रह)

दलबीर ‘फूल’ लिसानिया
Type: Print Book
Genre: Poetry, Reference
Language: Hindi
Price: ₹309 + shipping
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Description

“वस्त्र बोलते हैं” हरियाणवी लोकभाषा और जनजीवन से जुड़ा एक विशेष जनिका काव्य संग्रह है। इस पुस्तक में कवि दलबीर ‘फूल’ ने जनिका जैसी लघु एवं प्रभावशाली काव्य शैली के माध्यम से जीवन, समाज, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को सरल लेकिन तीखे शब्दों में अभिव्यक्त किया है।

पुस्तक का शीर्षक ही अपने भीतर एक गहरा सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अर्थ समेटे हुए है। वस्त्र केवल शरीर ढकने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान, सामाजिक भूमिका, संस्कृति, पद, जिम्मेदारी और मानसिकता को भी व्यक्त करते हैं। पुस्तक की भूमिका में भी वस्त्रों को समाज और व्यक्ति के जीवन का मौन दर्पण बताया गया है।

इस संग्रह की जनिकाओं में भ्रष्टाचार, शिक्षा, धर्म, परिवार, प्रेम, देशहित, शहीदों का बलिदान, पर्यावरण, सामाजिक विसंगतियाँ, मानवीय संबंध, संस्कार, जीवन-मूल्य और आम आदमी की समस्याओं जैसे अनेक विषय दिखाई देते हैं। छोटी-छोटी पंक्तियों में बड़ी बात कहने की यही विशेषता इस संग्रह को पठनीय और विचारोत्तेजक बनाती है।

कवि की रचनात्मक दृष्टि हरियाणवी लोकभाषा, लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है। वे कविता, रागनी, दोहा, कुण्डलिया, मुकरछंद, हास्य-कहानी, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और बाल साहित्य सहित अनेक विधाओं में लेखन कर चुके हैं। पुस्तक में दिए गए परिचय के अनुसार, जनिका उनकी विशिष्ट काव्य शैली है, जिसमें कम शब्दों में सार्थक भाव प्रस्तुत किए जाते हैं।

“वस्त्र बोलते हैं” केवल कविता पढ़ने की पुस्तक नहीं, बल्कि समाज और जीवन को एक अलग दृष्टि से देखने का अवसर देती है। हरियाणवी लोक-संवेदना, सामाजिक चेतना और संक्षिप्त काव्य अभिव्यक्ति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह संग्रह विशेष रूप से उपयोगी है।

About the Author

दलबीर ‘फूल’ लिसानिया हरियाणवी लोक साहित्य के बहुआयामी रचनाकार, लोक कवि एवं रेडियो सिंगर हैं। उनका मूल नाम दलबीर सिंह है। उनका जन्म 8 जून 1969 को ग्राम लिसान, जिला रेवाड़ी, हरियाणा में हुआ। उनके साहित्य का प्रमुख आधार हरियाणवी लोकभाषा, लोकसंस्कृति, ग्रामीण जीवन और सामाजिक सरोकार रहे हैं।

उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विधाओं में निरंतर लेखन किया है और अनेक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है। उनकी रचनाओं में हरियाणा की लोकभाषा, लोकसंस्कृति, ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाएँ और बदलता सामाजिक परिवेश प्रमुख रूप से दिखाई देता है।

पुस्तक की विशेषताएँ:
हरियाणवी लोक-संवेदना पर आधारित जनिका संग्रह
कम शब्दों में प्रभावशाली भाव-अभिव्यक्ति
सामाजिक एवं मानवीय विषयों पर केंद्रित रचनाएँ
लोकभाषा और लोकसंस्कृति की सहज अभिव्यक्ति
जीवन-मूल्यों एवं सामाजिक चेतना का संदेश
समकालीन सामाजिक परिस्थितियों पर सार्थक दृष्टि
हिंदी एवं हरियाणवी साहित्य के पाठकों के लिए उपयोगी

लक्षित पाठक:
यह पुस्तक हरियाणवी साहित्य, लोक साहित्य, कविता और जनिका विधा में रुचि रखने वाले पाठकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएँ पढ़ने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है।

Book Details

ISBN: 9788168963757
Publisher: Sjain Publication
Number of Pages: 116
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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