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चौराहे पर कृष्ण

एक लम्बी कविता
ध्रुवदेव मिश्र पाषाण
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹130 + shipping
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Description

“चौराहे पर कृष्ण” का पुन: प्रकाशन
कवि छोटी सी कविता में महाकाव्य रच देता है या फिर एक विशाल महाकाव्य को अपनी एक छोटी-सी कविता में समाहित कर लेता है । कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण ऐसे ही एक कवि हैं जिन्होंने महाभारत में निहित श्री कृष्ण के संपूर्ण व्यक्तित्व को, उनकी संपूर्ण क्रियाकलाप को, उनकी संपूर्ण चिंतन को एक लम्बी कविता में समाहित कर एक युग से गुजारते हुए दूसरे युग में लाकर खड़ा कर दिया है । महाभारत-कालीन आदि कवि व्यास ने जहां लाकर श्री कृष्ण को मुक्त कर दिया था वहीं से उठाकर आधुनिक कवि पाषाण "चौराहे पर कृष्ण" में उनको प्रश्नों के कठघरे में उनकी सम्पूर्ण मर्यादा सहित खड़ा करते हैं और उनसे वर्तमान की समस्याओं का हल मांगते हैं । ऐसे प्रश्न उठाने से पहले कवि पाषाण स्वयं कृष्ण की पीड़ा से गुजरते हैं, रोम-रोम से उसका अनुभव करते हैं और ऐसी परिस्थितियों से स्वयं को संभालते हुए मानव की वर्तमान पीड़ा को अपनी कविता में व्यक्त करते हैं । संवेदना के स्तर पर कवि पाषाण कई कालखंडों से ऊपर उठकर अन्तरिक्षीय दृष्टिकोण से समस्या को अवलोकन करने की भरसक कोशिश करते हैं । इसमें उन्होंने कहां तक सफलता हासिल की है यह तो कोई संवेदनशील पाठक ही बता सकता है। पाषाण जी कृष्ण को पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर शासन और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के हित में एक निरंतर संघर्षशील मानव के रूप में ही व्यक्त करना उचित समझते हैं ।
1993 में प्रथम प्रकाशित इस ग्रंथ की प्रतियां उपलब्ध नहीं थीं, यह डिजिटल ई-बूक और प्रिंट मिडिया में एक साथ पुनः प्रकाशित हो रहा है, यह जानकार बहुत हर्ष हो रहा है। साहित्य-समाज को इसके लिए बधाई।
- सत्य प्रकाश भारतीय 30-07-2022

About the Author

ध्रुवदेव मिश्र पाषाण

जीवन-वृत्त
जन्म : 9 सितम्बर 1939, इमिलिया,
जिला : देवरिया (उ०प्र०)
पिता : पं० संतप्रसाद मिश्र
माता : श्रीमती राजपति देवी
विवाह : पहली पत्नी स्व० विद्यावती देवी,
दूसरी पत्नी : शान्ती देवी
संतान : अर्चना, विश्वदेव, सरोज, नरेन्द्र,
देवेन्द्र, वाचस्पति, घनश्याम, सर्जना

प्रकाशित रचनाएँ :
(1) विद्रोह (नाटक) 1958, (2) लौट जाओ चीनियों : काव्य पुस्तिका 1962, (3) एक शीर्षकहीन कविता और पाँच अन्य कविताएँ 1968, (4) बन्दूक और नारे (एक लम्बी कविता) 1968, (5) मैं भी गुरिल्ला हूँ (काव्य- पुस्तिका ) 1969, (6) कविता तोड़ती है (काव्य- पुस्तिका) 1977, (7) विसंगतियों के बीच 1978, (8) धूप के पंख (काव्य-संग्रह) 1983, (9) खण्डहर होते शहर के अंधेरे में (1988), (10) वाल्मीकि की चिंता (लम्बी कविता ) 1992, (11) चौराहे पर कृष्ण (लम्बी कविता) 1993, (12) ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की कुछ कविताएँ (2000) (सं०-रमाशंकर प्रजापति), (13) पतझड़-पतझड़ वसंत (काव्य-संग्रह) 2009, सरगम के सुर साधे (2018)

सम्पादन : देवरिया टाइम्स (हिंदी साप्ताहिक-1964 ), प्रतिबद्ध (एक अंक लघुपत्रिका)-1970, प्रतिज्ञ (तीन कवियों का संग्रह)-1977, सह संपादक-प्रस्थान (लघुपत्रिका)-1979, खेल-खेल में (बाल कविताएँ-1985), जनपक्ष (साप्ताहिक-1977), सूरदास : एक सांदर्भिक पुनरावलोकन (1978), महाप्राण निराला (1998)

व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित ग्रन्थ
(1) धारदार शीशा- संपादक: लक्ष्मण केडिया
(2) ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की कविताओं में राजनैतिक चेतना (आलोचना) - नीरज कुमार सिंह

Book Details

ISBN: 9789395061001
Publisher: मरुतृण
Number of Pages: 56
Dimensions: 5.00"x8.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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