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योग और वैदिक विज्ञान

पंकज कुमार भारती
Type: Print Book
Genre: Performing Arts
Language: Hindi
Price: ₹325 + shipping
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Description

यह पुस्तक, जिसका शीर्षक “योग और वैदिक विज्ञान” है, केवल शब्दों की एक साधारण अभिव्यक्ति नहीं है; यह एक गहरी, सच्ची और निरंतर चलती हुई प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस प्रतिबद्धता में दो महान परम्पराओं—प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान—के बीच एक सजीव, गतिशील और परस्पर पूरक सेतु बनाना सम्मिलित है। अर्थात्, लेखक ने यह तय किया है कि वह न केवल योग को व्यायाम या ध्यान के रूप में प्रस्तुत करेगा, बल्कि इसे वह माध्यम बनाकर पेश करेगा जिसके द्वारा शरीर की शारीरिक तंदुरुस्ती, मन की शान्ति, और आत्मा की उन्नति एक ही धारा में बहते हुए एकीकृत हो सकें। इस प्रकार, इस पुस्तक का हर अध्याय, हर वाक्य, हर व्याख्या इस उद्देश्यों की पूर्ति के लिये सूक्ष्म और विचारशील रूप से तैयार की गई है।
वेदों, उपनिषदों, और आयुर्वेदिक शास्त्रों में निहित वैदिक विज्ञान, सृष्टि की मूलभूत संरचना, जीवाणु-ग्राम और ऊर्जा संतुलन के बारे में गहन समझ प्रदान करता है। दूसरी ओर, आधुनिक विज्ञान—भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान, मनोविज्ञान—इन सिद्धांतों को मापने योग्य, परीक्षण योग्य और प्रयोगशाला-आधारित रूप में प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में इन दो धागों को एक साथ बुनते हुए, लेखक ने यह दिखाया है कि कैसे “प्राण” (जीवन शक्ति) को “प्लाज़्मा” (शारीरिक पदार्थ) के साथ समरसता में लाया जा सकता है; कैसे “आसन” (शारीरिक अभिव्यक्ति) को “हॉर्मोनल संतुलन” (वैज्ञानिक शब्द) के साथ जोड़ा जा सकता है; तथा कैसे “ध्यान” को “न्यूरो-इमेजिंग” (दिमागी छवि) के माध्यम से मापा और प्रमाणित किया जा सकता है। इस प्रकार पुस्तक न केवल सिद्धांतों का संग्रह है, बल्कि एक प्रयोगशाला है जहाँ योग की प्राचीन परम्पराएँ वैज्ञानिक परीक्षणों के साथ मिलकर नई आशाएँ और नई संभावनाएँ उत्पन्न करती हैं।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है, जिन्होंने:
• जीवन शैली में तनाव, थकान व चक्रवात जैसे उतार चढ़ाव से निराशा महसूस की है।
• योग को केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में देखा था, परंतु उसकी गहरी आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक संभावनाओं को समझना चाहते हैं।
• वैदिक ज्ञान में रुचि रखी है, परंतु उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का मार्ग नहीं मिल पा रहा।
• स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याओं (जैसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह, नींद समस्या, अवसाद) के लिये वैकल्पिक एवं प्रमाणित उपाय खोज रहे हैं।
• आत्म ज्ञान, आत्म साक्षात्कार तथा समग्र विकास के लिये एक व्यवस्थित, चरणबद्ध एवं साक्ष्य आधारित मार्गदर्शिका चाहते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो “योग और वैदिक विज्ञान” पुस्तक एक दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक त्रिकोण बना कर प्रस्तुत करती है, जो पाठक को उसके भीतर के असंख्य संभावनाओं को पहचानने, उन्हें साकार करने, और एक संतुलित, सशक्त, एवं शांतिपूर्ण जीवन शैली अपनाने के लिये प्रेरित करती है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक साकारात्मक “आध्यात्मिक प्रतिबद्धता” है—जिसे समझकर, अपनाकर और निरन्तर अभ्यास में लाकर, प्रत्येक पाठक अपने जीवन को एक नई दिशा, एक नई रोशनी, और एक नई गहराई दे सकता है। यही इस पुस्तक का वास्तविक सार है, और यही कारण है कि इसे पढ़ने के बाद, हर व्यक्ति अपने अस्तित्व की अनन्त शक्ति, शान्ति, और ज्ञान की यात्रा में एक ठोस, वैज्ञानिक आधारित और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ कदम रखता है।

About the Author

पंकज कुमार भारती शारीरिक शिक्षा (Physical Education) के क्षेत्र में एक अत्यंत सजग, प्रखर और समर्पित शिक्षक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका व्यक्तित्व मात्र एक शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ऐसे मार्गदर्शक हैं जिन्होंने अपने छात्रों में खेल के प्रति जुनून और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को समाहित किया है। इस पुस्तक के माध्यम से श्री भारती ने शारीरिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न मौलिक और महत्वपूर्ण पहलुओं को अत्यंत सराहनीय ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने वर्षों के जमीनी अनुभव को सरल, सटीक और प्रभावी भाषा में पिरोया है। यह पुस्तक केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक मार्गदर्शन का एक उत्कृष्ट संग्रह है, ताकि पाठक शारीरिक शिक्षा के गूढ़ सिद्धांतों (जैसे बायोमैकेनिक्स, खेल मनोविज्ञान और फिटनेस प्रबंधन) को आसानी से समझ सकें और उन्हें अपने दैनिक जीवन शैली में आत्मसात कर एक स्वस्थ भविष्य की नींव रख सकें। वर्तमान में, श्री पंकज कुमार भारती अविराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन, टीको कुरु, लोहरदगा (झारखंड), भारत में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यहाँ वे अपनी शैक्षणिक कुशलता, व्यावहारिक दक्षता और दूरदृष्टि से भावी शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। वे प्रशिक्षु शिक्षकों में शारीरिक शिक्षा के प्रति न केवल जागरूकता पैदा कर रहे हैं, बल्कि उन्हें इस विषय में पारंगत (Expert) बनाकर समाज की मुख्यधारा में भेजने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे मानते हैं कि यदि एक शिक्षक शारीरिक रूप से चुस्त और मानसिक रूप से सतर्क होगा, तभी वह राष्ट्र के कर्णधारों को सही दिशा दे पाएगा। पंकज कुमार भारती का जीवन और उनका कार्य शिक्षण के प्रति उनके गहरे समर्पण और निष्ठा का परिचायक है। शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा स्थापित किए जा रहे नए आयाम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे। वे वास्तव में शिक्षा की उस धारा के संवाहक हैं, जो मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने की वकालत करती है।

Book Details

ISBN: 9788199049963
Publisher: RCIT
Number of Pages: 217
Dimensions: 5.83"x8.27"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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