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यह पुस्तक, जिसका शीर्षक “योग और वैदिक विज्ञान” है, केवल शब्दों की एक साधारण अभिव्यक्ति नहीं है; यह एक गहरी, सच्ची और निरंतर चलती हुई प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस प्रतिबद्धता में दो महान परम्पराओं—प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान—के बीच एक सजीव, गतिशील और परस्पर पूरक सेतु बनाना सम्मिलित है। अर्थात्, लेखक ने यह तय किया है कि वह न केवल योग को व्यायाम या ध्यान के रूप में प्रस्तुत करेगा, बल्कि इसे वह माध्यम बनाकर पेश करेगा जिसके द्वारा शरीर की शारीरिक तंदुरुस्ती, मन की शान्ति, और आत्मा की उन्नति एक ही धारा में बहते हुए एकीकृत हो सकें। इस प्रकार, इस पुस्तक का हर अध्याय, हर वाक्य, हर व्याख्या इस उद्देश्यों की पूर्ति के लिये सूक्ष्म और विचारशील रूप से तैयार की गई है।
वेदों, उपनिषदों, और आयुर्वेदिक शास्त्रों में निहित वैदिक विज्ञान, सृष्टि की मूलभूत संरचना, जीवाणु-ग्राम और ऊर्जा संतुलन के बारे में गहन समझ प्रदान करता है। दूसरी ओर, आधुनिक विज्ञान—भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान, मनोविज्ञान—इन सिद्धांतों को मापने योग्य, परीक्षण योग्य और प्रयोगशाला-आधारित रूप में प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में इन दो धागों को एक साथ बुनते हुए, लेखक ने यह दिखाया है कि कैसे “प्राण” (जीवन शक्ति) को “प्लाज़्मा” (शारीरिक पदार्थ) के साथ समरसता में लाया जा सकता है; कैसे “आसन” (शारीरिक अभिव्यक्ति) को “हॉर्मोनल संतुलन” (वैज्ञानिक शब्द) के साथ जोड़ा जा सकता है; तथा कैसे “ध्यान” को “न्यूरो-इमेजिंग” (दिमागी छवि) के माध्यम से मापा और प्रमाणित किया जा सकता है। इस प्रकार पुस्तक न केवल सिद्धांतों का संग्रह है, बल्कि एक प्रयोगशाला है जहाँ योग की प्राचीन परम्पराएँ वैज्ञानिक परीक्षणों के साथ मिलकर नई आशाएँ और नई संभावनाएँ उत्पन्न करती हैं।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है, जिन्होंने:
• जीवन शैली में तनाव, थकान व चक्रवात जैसे उतार चढ़ाव से निराशा महसूस की है।
• योग को केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में देखा था, परंतु उसकी गहरी आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक संभावनाओं को समझना चाहते हैं।
• वैदिक ज्ञान में रुचि रखी है, परंतु उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का मार्ग नहीं मिल पा रहा।
• स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याओं (जैसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह, नींद समस्या, अवसाद) के लिये वैकल्पिक एवं प्रमाणित उपाय खोज रहे हैं।
• आत्म ज्ञान, आत्म साक्षात्कार तथा समग्र विकास के लिये एक व्यवस्थित, चरणबद्ध एवं साक्ष्य आधारित मार्गदर्शिका चाहते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो “योग और वैदिक विज्ञान” पुस्तक एक दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक त्रिकोण बना कर प्रस्तुत करती है, जो पाठक को उसके भीतर के असंख्य संभावनाओं को पहचानने, उन्हें साकार करने, और एक संतुलित, सशक्त, एवं शांतिपूर्ण जीवन शैली अपनाने के लिये प्रेरित करती है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक साकारात्मक “आध्यात्मिक प्रतिबद्धता” है—जिसे समझकर, अपनाकर और निरन्तर अभ्यास में लाकर, प्रत्येक पाठक अपने जीवन को एक नई दिशा, एक नई रोशनी, और एक नई गहराई दे सकता है। यही इस पुस्तक का वास्तविक सार है, और यही कारण है कि इसे पढ़ने के बाद, हर व्यक्ति अपने अस्तित्व की अनन्त शक्ति, शान्ति, और ज्ञान की यात्रा में एक ठोस, वैज्ञानिक आधारित और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ कदम रखता है।
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