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ज़मीन से महानता तक: संजीव गोयंका की गाथा
आधुनिक उद्योग जगत और खेल के इस तीव्र, उच्च-स्तरीय प्रांगण में, दूरदर्शिता और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम विरले ही देखने को मिलता है। यह पुस्तक मात्र एक जीवनी नहीं है; यह एक ऐसे महान दूरदर्शी और उद्योगपति के अंतस की अगाध यात्रा है, जिन्होंने कॉर्पोरेट जगत के विशाल शिखरों से लेकर लखनऊ सुपरजायंट्स जैसी जीवंत और ऊर्जावान खेल फ्रेंचाइजी तक के सफर को स्वर्णिम आयाम दिए हैं।
यह कृति अटूट संकल्प, राष्ट्रभक्ति और जन-जन की शक्ति में अडिग विश्वास की कहानी है। यह हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता केवल बैलेंस शीट में नहीं, बल्कि उन अनगिनत इंसानों के दिलों की धड़कन में बसती है जो साथ मिलकर इतिहास रचते हैं।
लेखक का एक विनम्र संदेश और आत्मस्वीकार:
"मैं पंद्रह वर्ष का एक साधारण छात्र हूँ जो वर्तमान में दसवीं कक्षा में अध्ययनरत हूँ। यह पुस्तक सत्य घटनाओं और एक महान जीवन से प्रेरित है, किंतु इसे और अधिक रोचक बनाने के लिए इसमें कुछ काल्पनीय और नाटकीय तत्वों का भी समावेश किया गया है। चूँकि मैं अभी ज्ञान अर्जन कर रहा हूँ और एक अज्ञान, तरुण लेखक हूँ, अतः यदि इस रचना में अनजाने में किसी की भी भावनाएँ आहत हुई हों, तो मैं समस्त पाठकों से विनम्रतापूर्वक क्षमाप्रार्थी हूँ। मेरा एकमात्र उद्देश्य अपनी लेखन के प्रति अगाध प्रेम और प्रेरणा को पाठकों तक पहुँचाना है।"
इस पुस्तक के रचयिता हैं—प्रेमयोगेश विलासराव यादव, जो मुंबई क्रिकेट असोसिएशन (MCA) के एक समर्पित और तीव्र गति के तेज गेंदबाज (Fast Bowler) हैं। यह पुस्तक केवल एक उद्योगपति की गाथा नहीं, बल्कि एक युवा सपने देखने वाले के अदम्य साहस का प्रतीक भी है।
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