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एक सुनसान हिमालयी वुडहाउस। बर्फ से कटी दुनिया। दस पुराने दोस्त। और एक के बाद एक होने वाली हत्याएँ। जब पाँच दोस्त अपनी पत्नियों के साथ छुट्टियों के लिए हिमाचल की एक पुरानी, अलग-थलग विंटेज हवेली में पहुँचते हैं, तो माहौल खुशनुमा होता है।
लेकिन पहली रात के बाद सब बदल जाता है। पहली लाश मिलती है — गला रेता हुआ, पास में एक नक्काशीदार लकड़ी की डिबिया, जिसमें सूखी मेहंदी की पत्तियाँ और एक फटा कागज़ — *"पाप का पहला अक्षर — र।"* फिर दूसरी। फिर तीसरी। हर लाश के पास वही डिबिया। हर बार एक नया संदेश। कोई बाहर नहीं आया। कोई बाहर नहीं जा सकता। कातिल उन्हीं के बीच है।
और अब मैदान में आती है **इंस्पेक्टर रेवा शेखावत** — एक ठंडी, तीखी, कहावतों की रानी, जिसकी चाँदी की सलाई और मोगरे की खुशबू कातिल की रगों में सिहरन पैदा कर देती है। उसके साथ है हवलदार माधोसिंह, जो हर बात पर मूँछों को ताव देता है। जैसे-जैसे रेवा पुरानी साज़िश, छुपे हुए गुनाह और बरसों पुराने बदले की परतें खोलती जाती है, पाठक का दिमाग चकराने लगता है। हर किरदार संदिग्ध लगता है। हर ट्विस्ट और भी गहरा जाता है।
**क्या रेवा इस उलझे हुए जाल को सुलझा पाएगी?** **या इस बार कातिल उससे भी आगे निकल जाएगा?**
**एक ऐसा थ्रिलर जो आखिरी पन्ने तक आपको साँस रोककर पढ़ने पर मजबूर कर देगा।**
**मौत की स्याह सराय** — जहाँ हर कहावत एक सुराग है, हर खुशबू एक चेतावनी, और हर ट्विस्ट… एक नया झटका।
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