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मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष
श्रीकृष्ण को हमने अक्सर मुरली बजाते, मुस्कुराते और प्रेम बाँटते हुए देखा है। लेकिन उस मुस्कान के पीछे छिपे संघर्ष को कितने लोग जानते हैं?
“मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष” श्रीकृष्ण के जीवन की उस यात्रा को शब्द देती है, जहाँ जन्म से पहले ही संकट उनका इंतज़ार कर रहा था और जीवन के हर पड़ाव पर उन्हें कठिन निर्णय लेने पड़े।
गोकुल की सरल बाल-लीलाओं से लेकर मथुरा के अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष तक, वृंदावन के प्रेम से लेकर द्वारका के निर्माण तक और अंततः कुरुक्षेत्र के धर्मसंकट तक—यह कथा कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखने का प्रयास है जिसने अपने सुख से अधिक धर्म और लोककल्याण को चुना।
उनकी मुरली में प्रेम था,
उनकी मुस्कान में करुणा थी,
उनके मौन में गहराई थी,
और उनके प्रत्येक निर्णय के पीछे एक संघर्ष था।
यह पुस्तक उसी अनकही कहानी को सामने लाने का प्रयास है—
उस मुरलीधर की कहानी, जिसकी मुस्कान के पीछे एक पूरा युग संघर्ष कर रहा था।
मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष
एक ऐसी यात्रा, जहाँ प्रेम भी है, युद्ध भी;
मुरली भी है, सुदर्शन भी;
मुस्कान भी है, और उसके पीछे छिपा हुआ संघर्ष भी।
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