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मुरलीधर

मुस्कान के पीछे का संघर्ष
प्रिंस राज
Type: Print Book
Genre: Poetry, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹179 + shipping
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Description

मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष

श्रीकृष्ण को हमने अक्सर मुरली बजाते, मुस्कुराते और प्रेम बाँटते हुए देखा है। लेकिन उस मुस्कान के पीछे छिपे संघर्ष को कितने लोग जानते हैं?

“मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष” श्रीकृष्ण के जीवन की उस यात्रा को शब्द देती है, जहाँ जन्म से पहले ही संकट उनका इंतज़ार कर रहा था और जीवन के हर पड़ाव पर उन्हें कठिन निर्णय लेने पड़े।

गोकुल की सरल बाल-लीलाओं से लेकर मथुरा के अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष तक, वृंदावन के प्रेम से लेकर द्वारका के निर्माण तक और अंततः कुरुक्षेत्र के धर्मसंकट तक—यह कथा कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखने का प्रयास है जिसने अपने सुख से अधिक धर्म और लोककल्याण को चुना।

उनकी मुरली में प्रेम था,
उनकी मुस्कान में करुणा थी,
उनके मौन में गहराई थी,
और उनके प्रत्येक निर्णय के पीछे एक संघर्ष था।

यह पुस्तक उसी अनकही कहानी को सामने लाने का प्रयास है—
उस मुरलीधर की कहानी, जिसकी मुस्कान के पीछे एक पूरा युग संघर्ष कर रहा था।

मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष
एक ऐसी यात्रा, जहाँ प्रेम भी है, युद्ध भी;
मुरली भी है, सुदर्शन भी;
मुस्कान भी है, और उसके पीछे छिपा हुआ संघर्ष भी।

About the Author

प्रिंस राज एक युवा लेखक और कवि हैं, जिनकी लेखनी भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाओं और जीवन के गहरे संघर्षों को शब्द देने का प्रयास करती है। उनकी रचनाओं में इतिहास और अध्यात्म के साथ मानवीय भावनाओं का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

उनका लेखन केवल किसी पात्र की कथा कहने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके पीछे छिपे संघर्ष, निर्णय, त्याग और भावनाओं को समझने का प्रयास करता है।

उनकी पहली पुस्तक “राधेय — सूर्यपुत्र कर्ण की अमर गाथा” के बाद “मुरलीधर — मुस्कान के पीछे का संघर्ष” उनकी साहित्यिक यात्रा का अगला पड़ाव है।

इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने श्रीकृष्ण के उस स्वरूप को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जो उनकी प्रसिद्ध मुस्कान और मुरली के पीछे छिपा था—एक ऐसा कृष्ण, जिसने जीवनभर परिस्थितियों से संघर्ष किया, कठिन निर्णय लिए और धर्म के मार्ग को चुना।

प्रिंस राज का उद्देश्य भारतीय पौराणिक कथाओं को सरल, भावपूर्ण और काव्यात्मक भाषा में नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।

Book Details

Publisher: प्रिंस राज
Number of Pages: 124
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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