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“वजूद” जीवन के अस्तित्व, परिवर्तन और स्वीकृति की गहन व्याख्या है। यह कविता बताती है कि जीवन एक संयोग से शुरू होता है, लेकिन समय और अनुभव उसे एक पहचान देते हैं। हमारे तन-मन, विचार और परिस्थितियाँ लगातार बदलती रहती हैं, और इन्हीं परिवर्तनों के बीच हमारा असली वजूद आकार लेता है। यह रचना हमें सिखाती है कि हर बदलाव को स्वीकार करना ही जीवन की सच्चाई है। इसमें संघर्ष, धैर्य और आत्मबल की झलक मिलती है—जहाँ इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी खड़ा रहना सीखता है। “वजूद” यह भी दर्शाती है कि जीवन को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं, लेकिन उसे समझना और जीना हमारे हाथ में है। अंततः, यह कविता हमें अपने अस्तित्व को पहचानने और उसे आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
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